बिरसा मुण्डा जयंती पर पांढुर्णा में आदिवासी व्यंजनों की शानदार प्रदर्शनी, परंपरा और स्वाद का संगम!

पांढुर्ना |दिनांक 07 नवंबर 2025 को जनपद पंचायत पांढुर्णा के प्रांगण में महान स्वतंत्रता सेनानी और जननायक भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति से जुड़े पारंपरिक व्यंजनों की एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसने स्थानीय लोगों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य आदिवासी खान-पान की पौष्टिकता और स्वाद को मुख्यधारा से जोड़ना था।

मुख्य बिंदु 

  • पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन: प्रदर्शनी में आदिवासी संस्कृति के पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजनों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। लोगों ने महुवे के लड्डू, बाजरा/ज्वार/मक्का की रोटी, और कोदो-कुटकी जैसे पारंपरिक अनाजों से बने विविध व्यंजनों का भरपूर लुत्फ उठाया।
  • आयोजक और प्रतिभागी: इस सफल आयोजन में आजीविका मिशन पांढुर्णा के अंतर्गत कार्यरत कई स्वसहायता समूहों और छात्रावासों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
    • स्वसहायता समूह: साईराम स्वसहायता समूह, भारत माता स्वसहायता समूह पारडी।
    • छात्रावास: अनुसुचित जनजाति बालक, छात्रावास पांढुर्णा, अनुसचित जाति बालक छात्रावास पांढुर्णा, अनुसचित जनजाति कन्या छात्रावास पांढुर्णा, अनुसुचित जनजाति छात्रावास नांदनवाड़ी, आदिवासी आश्रम गायखुरी।
  • अधिकारियों की उपस्थिति: प्रदर्शनी को देखने और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
    • वरिष्ठ अधिकारी: अतिरिक्त कलेक्टर श्री नीलमणी अग्निहोत्री, संयुक्त कलेक्टर सुश्री नेहा सोनी, सुश्री मेघा शर्मा, एसडीएम श्रीमती अल्का एक्का, एसडीएम सौसर श्री सिद्धार्थ पटेल, तहसीलदार श्री विनय प्रकाश ठाकुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती बंदु सूर्यवंशी
    • जनप्रतिनिधि: जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लता बाई तुमडाम, उपाध्यक्ष श्री भीमराव वालके
    • अन्य विभाग: चंद्रशेखर ढोने (ब्लॉक समन्वयक, NRLM विभाग) तथा जनजाति विभाग से कुमरे जी सहित अन्य अधिकारी/कर्मचारी और स्वसहायता समूह के सदस्य उपस्थित रहे।
  • संस्कृति का सम्मान: कार्यक्रम ने न केवल भगवान बिरसा मुण्डा के बलिदान को याद किया, बल्कि आदिवासी जीवनशैली और पारंपरिक खान-पान के महत्व को भी रेखांकित किया, जिसे ‘मिलेट वर्ष’
  • के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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