
पांढुर्ना |पांढुर्णा की कानूनी बिरादरी के लिए शुक्रवार का दिन उत्सव और निर्णायक रहा, जब पांढुर्णा तहसील अधिवक्ता संघ के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इन चुनावों ने न केवल संघ के नए नेतृत्व का चुनाव किया, बल्कि एक ऐतिहासिक जीत भी दर्ज कराई!
मुख्य आकर्षण: लगातार तीसरी बार ‘केवटे’ का जलवा
इस चुनाव के केंद्र में रहे अधिवक्ता विजय केवटे, जिन्होंने लगातार तीसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया है। यह जीत न केवल उनकी लोकप्रियता बल्कि संघ के प्रति उनके समर्पण और सफल नेतृत्व पर वकीलों के अटूट विश्वास को दर्शाती है।
नई टीम, नए चेहरे: पद और पदाधिकारी

विजय केवटे के नेतृत्व में संघ को एक नई और ऊर्जावान टीम मिली है। निर्वाचन अधिकारियों (अधिवक्ता विजय हलवे, राकेश शर्मा और शैलेन्द्र बांबल) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, नव-निर्वाचित पदाधिकारियों की सूची इस प्रकार है:
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- अध्यक्ष: विजय केवटे (लगातार तीसरी बार)
- सचिव: अंजुम शेख
- सहसचिव: शैलेश भगत
- उपाध्यक्ष (संयुक्त रूप से): परसराम कड़वे और अनिल सोनी
- कोषाध्यक्ष: प्रमोद ढोके
- ग्रंथपाल: प्रभु मोहबे
एकजुटता की शक्ति: चुनाव में कुल 64 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो इस बात का प्रमाण है कि पांढुर्णा का अधिवक्ता संघ अपने नेतृत्व के चुनाव को लेकर कितना जागरूक और एकजुट है।
खुशियों का माहौल: जीत का जश्न
जैसे ही परिणामों की घोषणा हुई, पांढुर्णा तहसील परिसर खुशी से झूम उठा। साथी अधिवक्ताओं ने विजयी पदाधिकारियों का फूल-हारों से जोरदार स्वागत किया और उन्हें बधाई दी। यह क्षण न केवल नई टीम के लिए सम्मान का था, बल्कि यह अधिवक्ता संघ के भाईचारे और सौहार्द को भी उजागर कर रहा था।
निष्कर्ष: अबकी बार, और भी दमदार!
विजय केवटे का लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनना यह संकेत देता है कि पांढुर्णा तहसील अधिवक्ता संघ स्थिर और अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता देता है। अंजुम शेख और शैलेश भगत जैसे सक्रिय सदस्यों के महत्वपूर्ण पदों पर आने से यह उम्मीद जगी है कि संघ नए आयाम छुएगा और अधिवक्ताओं के हितों के लिए और भी मजबूती से काम करेगा। यह चुनाव पांढुर्णा की कानूनी दुनिया के लिए एक नए, सफल और प्रगतिशील युग की शुरुआत है।

