प्यार और विश्वास के रिश्ते पर कलंक…” – न्याय की यह लड़ाई दिल दहला देगी!

सौंसर/पांढुर्णा: एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बहू-ससुर के पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर दिया है। सौंसर की शांत फिजाओं में छिपा यह गंभीर अपराध तब उजागर हुआ जब एक महिला ने हिम्मत कर अपने साथ हुई क्रूरता की कहानी पुलिस के सामने रखी। कहानी, जो अब से छह साल पहले शुरू हुई थी, जब उस महिला को उसके ही ससुर ने, जान से मारने की धमकी देकर, अपना शिकार बनाया था।
दहशत में बीता हर दिन:
फरियादिया ने पुलिस को बताया कि उसके ससुर, हाजी मेहमूद खान (उम्र 75 वर्ष), ने न केवल उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया, बल्कि इस घिनौने कृत्य के कारण वह गर्भवती भी हो गई और उसने एक बेटे को जन्म दिया, जो आज 6 साल का है। इतने सालों तक यह भयानक राज धमकी और डर की दीवारों के पीछे दफन रहा। हर दिन अपने गुनाहगार के साथ एक छत के नीचे रहना उस महिला के लिए किसी जीवित नरक से कम नहीं था।
पुलिस की जाँबाज कार्रवाई: एक रात में न्याय की ओर कदम
यह मामला पांढुर्णा पुलिस अधीक्षक, श्री सुन्दर सिंह कनेश के संज्ञान में आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, श्री नीरज सोनी और अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सौंसर, श्रीमती प्रियंका पाण्डेय के मार्गदर्शन में, थाना प्रभारी निरीक्षक रूपलाल उईके ने तत्काल एक विशेष टीम गठित की।
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- 7 नवंबर 2025 की देर शाम, जैसे ही फरियादिया का आवेदन थाना सौंसर पहुंचा, पुलिस हरकत में आ गई।
- टीम ने तत्परता दिखाते हुए, न केवल मामले को अपराध क्र. 519/2025 के तहत धारा 376(2)(\text{च}), 376(2)(\text{n}), 506 भादवि के तहत पंजीबद्ध किया, बल्कि आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए चौतरफा जाल बिछा दिया।
“हमारा लक्ष्य था पीड़िता को न्याय दिलाना और समाज को यह संदेश देना कि कोई भी, कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, ऐसे जघन्य अपराध करके बच नहीं सकता।” – पुलिस अधिकारी (नाम गोपनीय)
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
पुलिस टीम, जिसमें उप निरीक्षक अनिता सराठे, उप. निरी. प्रहलाद बैरागी, आर. 544 अखिलेश प्रताप सिंह और आर. 473 मनीष टेमरे शामिल थे, ने गोल बाजार, सिविल लाइन सौंसर निवासी 75 वर्षीय आरोपी हाजी मेहमूद खान को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार कर लिया। इस त्वरित कार्रवाई ने सौंसर क्षेत्र में पुलिस की मुस्तैदी का एक सशक्त उदाहरण पेश किया।
आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
आगे क्या?
सौंसर पुलिस की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने एक पीड़िता को न्याय की पहली किरण दिखाई है। 6 साल की चुप्पी टूटी है और एक 6 साल के बच्चे के भविष्य पर मंडरा रहा डर का साया हटा है। यह कहानी बताती है कि न्याय की लड़ाई में उम्र या सामाजिक रुतबा मायने नहीं रखता, सत्य और साहस ही अंततः विजयी होते हैं। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और सज़ा पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

