आक्रोश की हुंकार: पांढुर्णा के पत्रकारों ने ‘सड़क से सदन’ तक बुलंद की आवाज़!

कलेक्टर कार्यालय पर गूँजी ‘गुड्डू कावले’ की अगुवाई में पत्रकारों की गर्जना; 6 सूत्रीय माँग पत्र सौंप, सुरक्षा और सम्मान की रखी माँग।

पांढुर्णा | सोमवार को पांढुर्णा की सड़कें इतिहास रचते हुए एक नए अंदाज़ की गवाह बनीं। “चौथी सत्ता” के सजग प्रहरी—पत्रकार, जो अक्सर दूसरों की आवाज़ बनते हैं, आज अपनी ही सुरक्षा, सम्मान, और बुनियादी हक़ों के लिए सड़कों पर उतरे। मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ की जिला इकाई पांढुर्णा ने अपने अध्यक्ष सचिन (गुड्डू) कावले की करिश्माई अगुवाई में एक ऐसी रैली निकाली, जिसने न केवल प्रशासन का ध्यान खींचा, बल्कि आमजनता के दिलों में भी पत्रकारों के संघर्ष की एक गहरी छाप छोड़ दी।

राजीव गांधी मार्केट से निकला ‘लोकतंत्र का काफिला’

​रैली की शुरुआत राजीव गांधी मार्केट से हुई। यह सिर्फ पत्रकारों का समूह नहीं था, बल्कि ‘लोकतंत्र का काफिला’ था, जिसके हाथों में न्याय, सुरक्षा और सम्मान के बैनर थे। भीषण गर्मी और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच, इन पत्रकारों का ज़ज़्बा देखने लायक था। इनकी माँगों को केवल दफ़्तरों तक सीमित नहीं रखना था, बल्कि सड़क पर उतरकर आमजनता को यह संदेश देना था कि आज पत्रकारों को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए मज़बूत सुरक्षा कवच की ज़रूरत है। इस रैली का मक़सद स्पष्ट था: पत्रकारों की माँगों को सिर्फ़ प्रशासनिक फ़ाइल नहीं, बल्कि जन-चर्चा का विषय बनाना।

‘शलभ भदौरिया’ के आह्वान पर निर्णायक प्रहार

​जिला अध्यक्ष सचिन (गुड्डू) कावले ने कमान संभाली और बताया कि यह आंदोलन प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया के आह्वान पर शुरू हुआ है। कावले ने स्पष्ट किया कि पत्रकार सिर्फ़ ख़बर छापने की मशीन नहीं हैं, बल्कि समाज के एक ज़रूरी स्तंभ हैं, और उन्हें अब हाशिये पर नहीं रखा जा सकता।

​पांढुर्णा इकाई ने ज़िला कलेक्टर नीरज वशिष्ठ को मुख्यमंत्री के नाम 6 सूत्रीय ‘रोडमैप’ सौंपते हुए पत्रकार समुदाय की निर्णायक ज़रूरतें सामने रखीं।

प्रमुख 6 सूत्रीय माँगे, जो बदल सकती हैं पत्रकारिता का भविष्य:

  1. मान्यता प्राप्त पत्रकारों को विशेष सरकारी सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
  2. असंगठित पत्रकारों के लिए एक मज़बूत सुरक्षा क़ानून बनाना।
  3. पत्रकार कल्याण कोष की राशि में भारी वृद्धि कर, आकस्मिक ज़रूरत पर सहारा देना।
  4. पांढुर्णा ज़िले में अत्याधुनिक “पत्रकार भवन” का निर्माण कराना।
  5. राज्य स्तर पर ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ को केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि ‘प्रभावी ढंग से’ लागू करना।

कलेक्टर ने दिया भरोसे का हाथ

​कलेक्टर नीरज वशिष्ठ ने इस ऐतिहासिक रैली और इसकी माँगे सुनकर गंभीरता दिखाते हुए पत्रकारों को निराश नहीं किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि ज्ञापन को महज़ औपचारिकता न मानते हुए, शासन के सर्वोच्च स्तर पर भेजा जाएगा और संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

​इस शक्ति प्रदर्शन में संघ के प्रमुख स्तंभ—महा सचिव सुधीर नांदेकर, सुभाष पराड़कर, धनंजय जोशी, अनिल सांबारे, मनोज गुडधेसुनील कवडे,सिराज भाई, प्रवीण वाहने, योगेश गजभिए, श्रीराम घोटे पवार, रवि नारनवारे, नीलेश कलसकर और संजय चिंचालकर जैसे वरिष्ठ पत्रकार  के साथ उपस्थित रहे, जो इस एकजुटता को एक निर्णायक शक्ति प्रदान कर रहा था।

​पत्रकारों का यह एकजुट प्रयास स्पष्ट संदेश देता है: अब वे चुपचाप अत्याचार सहने को तैयार नहीं हैं। यह रैली सिर्फ़ एक ज्ञापन नहीं थी, बल्कि न्याय और सम्मान के लिए एक सामूहिक संकल्प थी, जिसकी गूँज अब भोपाल के गलियारों तक सुनाई देगी।

​ विशेष नोट:

पत्रकारों ने यह रैली विशेष रूप से राजीव गांधी मार्केट जैसे सार्वजनिक स्थल से निकाली ताकि आमजनता भी इस प्रक्रिया को नज़दीक से देखें और यह समझें कि जो पत्रकार उनके लिए आवाज़ उठाते हैं, वे आज खुद अपनी सुरक्षा और बुनियादी हक़ों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रैली का नेतृत्व श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला इकाई पांढुर्णा के अध्यक्ष सचिन (गुड्डू) कावले ने किया, जिन्होंने अपनी ज़बरदस्त संगठन क्षमता से इस आंदोलन को एक निर्णायक मोड़ दिया।

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