पांढुर्णा। शहर के नागरिकों के लिए यह एक गर्व का क्षण है! प्रशासन ने बस स्टैंड पर अतिक्रमण हटाने की जो कड़ी और आवश्यक मुहिम छेड़ी है, वह दिखाती है कि सुशासन केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी संभव है। राहत की साँस लेते हुए यात्री अब बस स्टैंड को व्यवस्थित होते देखेंगे—इस साहसिक पहल के लिए प्रशासन तारीफ का हक़दार है!
लेकिन… जैसे ही यह ‘सफाई अभियान’ अपने एक हिस्से में कामयाब दिखता है, ठीक उसी क्षण शहर के दूसरे कोने से एक अंधेरा सवाल खड़ा हो जाता है, जो प्रशासन की नीयत पर गहरी चोट करता है।
क्या यह छोटे-बड़े का खेल है?
, आप ही बताइए! यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि न्याय और भावना का सवाल है।
- छोटे का उदाहरण: बस स्टैंड पर पाँच फ़ीट की जगह घेरकर चाय बेचता गरीब व्यक्ति, जिसकी रोज़ी-रोटी उस जगह से जुड़ी है, उसे तुरंत कानूनी डंडा दिखाया जाता है।
- बड़े का उदाहरण: वहीं, संविधान रचयिता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के पास स्थित बहुमूल्य नजूल (सरकारी) भूमि पर एक विशाल, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा हो रहा है। यहाँ लाखों की उगाही के आरोप लगते हैं, और आर्किटेक्ट से लेकर बाबू तक सब पर मिलीभगत का संदेह है।
क्या यह न्याय है? एक तरफ मामूली जगह के लिए सख्ती और दूसरी तरफ करोड़ों की सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग पर प्रशासन की चुप्पी?
इसे उदाहरण से समझिए: अगर कोई व्यक्ति ₹500 का सरकारी बिजली का तार चुराता है, तो उसे जेल होती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति बाबूओं से मिलकर ₹5 करोड़ की नजूल भूमि पर चुपचाप कब्ज़ा कर लेता है, तो क्या उसे ‘कानूनी संरक्षण’ मिल जाता है?
‘नजूल’ का चोर-दरवाजा कहाँ है?

संविधान ने हमें सिखाया कि कानून सबके लिए समान है। फिर नजूल भूमि के इस निर्माण में ‘समानता’ कहाँ गई?
प्रशासन, अगर आप बस स्टैंड पर नियमों का पालन करवा रहे हैं, तो संविधान रचयिता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के पीछे स्थित नजूल की जमीन पर बन रहे इस संदेहास्पद कॉम्प्लेक्स के लिए भी आपको वही पारदर्शिता दिखानी होगी।
- सवाल: अनुमति किसने दी?—निर्माण की ‘नपा अनुमति’, ‘राजस्व NOC’ और नजूल परिवर्तन की फाइल की पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है?
- सवाल: अधिकारी आँख बंद क्यों?—जब भ्रष्टाचार और मिलीभगत के इतने तीखे आरोप हैं, तो संबंधित बाबू/अधिकारी की उच्च स्तरीय जाँच तुरंत क्यों नहीं शुरू की गई?
हमारी मांग सीधी है: बस स्टैंड पर अतिक्रमण हटाओ मुहिम की तरह ही, प्रशासन को इस नजूल निर्माण की पूरी प्रक्रिया को खोलकर शहर के सामने रखना होगा। अगर निर्माण नियमानुसार है, तो डर कैसा? और अगर नहीं है, तो तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए!
संदेश स्पष्ट है: प्रशासन एक अच्छा काम कर रहा है, पर जनता का विश्वास तभी पूरा होगा जब छोटे और बड़े, दोनों मामलों में कानून का डंडा समान रूप से चलेगा!


