
पांढुर्णा: कहते हैं इतिहास पन्नों पर लिखा जाता है, लेकिन आज पांढुर्णा की सड़कों पर इतिहास ‘पैरों’ से लिखा गया। संत संताजी जगनाडे महाराज के मूर्ति अनावरण समारोह में आज शहर ने वह नजारा देखा, जिसकी मिसाल आने वाली पीढ़ियां देंगी। एक तरफ 1 किलोमीटर लंबी कतार, 5000 से ज्यादा लोगों का जनसैलाब, और दूसरी तरफ दो समाजों (तेली और कुनबी) के बीच बहती प्रेम की गंगा। आज पांढुर्णा जीत गया, आज एकता जीत गई!
वह जादुई पल: जब सांसद के हाथों ‘देवत्व’ का साक्षात्कार हुआ

दोपहर के 12 बज रहे थे। हजारों आंखें संत जगनाडे चौक पर टिकी थीं। मुख्य अतिथि सांसद विवेक (बंटी) साहू ने जैसे ही मूर्ति अनावरण की डोर खींची और संत संताजी के तेजस्वी स्वरूप से पर्दा हटा, पूरा वातावरण “संत संताजी महाराज की जय” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
वह पल बेहद भावुक था। आकाश से पुष्पवर्षा हो रही थी और जमीन पर खड़े हजारों श्रद्धालुओं की आंखों में खुशी के आंसू थे। सांसद बंटी साहू ने भी इस पल को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया और भावविभोर होकर समाज को नमन किया। उन्होंने अपनी दरियादिली दिखाते हुए समाज भवन व विकास कार्यों के लिए राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये करने की घोषणा की, जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं ले रही थी।
1 किलोमीटर लंबी कतार और कुनबी समाज की ‘मिठास’

इस आयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर शोभायात्रा में देखने को मिली। 1 किलोमीटर लंबी इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में जब 5000 से अधिक लोग झूमते-गाते निकले, तो शहर थम गया।
लेकिन दिल जीतने वाला नजारा तब दिखा जब ‘तुकाराम सेवा समिति’ (कुनबी समाज) के भाइयों ने तेली समाज की इस रैली का स्वागत किया। भीषण भीड़ और उत्साह के बीच कुनबी समाज के युवाओं ने अपने हाथों से रैली में शामिल लोगों को ठंडा शरबत पिलाकर स्वागत किया।
यह केवल शरबत नहीं था, यह पांढुर्णा की सामाजिक एकता की मिठास थी। संताजी (तेली) और तुकाराम (कुनबी) का जो आध्यात्मिक रिश्ता सदियों पहले था, आज पांढुर्णा की सड़कों पर वही भाईचारा जीवंत हो उठा।
विधायक उईके ने दी आत्मीय बधाई

समारोह में विधायक श्री निलेश उईके ने अपनी उपस्थिति से चार चांद लगा दिए। उन्होंने समाज को इस भव्य आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाइयां दीं। उन्होंने कहा कि “संताजी के विचार आज भी हमें जोड़कर रखते हैं और आज की यह भीड़ इस बात का सबूत है कि पांढुर्णा में धर्म और संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं।”
सफल आयोजन: एक मिसाल

आयोजन समिति के अध्यक्ष भूषण केवटे और उनकी पूरी टीम ने साबित कर दिया कि जब युवा ठान लें, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। अनुशासन इतना कि 5000 की भीड़ में भी कोई अव्यवस्था नहीं हुई, और उत्साह इतना कि शाम तक लोग वहां डटे रहे।
निष्कर्ष: आज का दिन सिर्फ एक मूर्ति स्थापना का दिन नहीं था, बल्कि यह उस भरोसे की जीत थी कि पांढुर्णा के लोग सुख-दुख और उत्सव में एक-दूसरे के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।

