May 15, 2026 11:37 pm

पांढुर्णा का ‘सुपर-डे’: 45 करोड़ से बदलेगी वर्धा रोड की तकदीर, पुलिस सिखा रही ‘शक्ति’ का पाठ; पढ़िए लखपति किसान और एक्शन मोड में आए कलेक्टर की पूरी रिपोर्ट

 एक्शन मोड में प्रशासन

कलेक्टर के सख्त तेवर: 45 करोड़ से होगा वर्धा रोड का कायाकल्प, ‘जन-गण-मन’ अभियान से गांव-गांव पहुंचेगी सरकार

पांढुर्णा। जिले में विकास की रफ्तार और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ अब पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। मंगलवार को समय-सीमा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन और जनता की शिकायतों का निराकरण सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखना चाहिए। जिलेवासियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि पांढुर्णा से वर्धा नदी मार्ग के जीर्णोद्धार के लिए 4500 लाख (45 करोड़) रुपये का मेगा प्रस्ताव भेजा गया है, जो जल्द ही इस सड़क की तस्वीर बदल देगा।

​बैठक में कलेक्टर ने एक और बड़ी पहल करते हुए ‘जन-गण-मन’ अभियान की घोषणा की। अब अधिकारी AC कमरों से निकलकर अगले 10 दिनों तक गांवों की खाक छानेंगे और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुलझाएंगे। इसके अलावा रायबासा की अनीता धुर्वे के निःशुल्क ऑपरेशन और मांडवी नहर की मरम्मत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी तत्काल फैसले लिए गए। प्रशासन की यह सक्रियता बता रही है कि सुशासन अब केवल नारा नहीं, बल्कि हकीकत बनने जा रहा है।

 पुलिस की नई पहल

खाकी का दोस्ताना अंदाज: पांढुर्णा में ‘सृजन’ का शंखनाद, अब बच्चों को ‘शक्ति से सुरक्षा’ का पाठ पढ़ाएगी पुलिस

पांढुर्णा। पुलिस का नाम सुनते ही अक्सर डर का भाव आता है, लेकिन पांढुर्णा पुलिस अब बच्चों की दोस्त बनकर उन्हें सशक्त बनाने निकल पड़ी है। पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश के निर्देशन में “सृजन कार्यक्रम” का शानदार आगाज हुआ है। 15 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का मकसद सिर्फ पुलिसिंग नहीं, बल्कि किशोर-किशोरियों के व्यक्तित्व को निखारना है। इसकी थीम ही “शक्ति से सुरक्षा की ओर” रखी गई है, जो अपने आप में एक बड़ा संदेश है।

​कार्यक्रम का शुभारम्भ एएसपी नीरज सोनी और थाना प्रभारी अजय मरकाम की मौजूदगी में हुआ। अगले दो हफ्तों तक शहर में बच्चों के लिए आत्मरक्षा के गुर, खेलकूद, भाषण और वाद-विवाद जैसी रोमांचक गतिविधियां होंगी। ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान के सहयोग से चल रही इस मुहिम से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि पुलिस और जनता के बीच की दूरियां भी मिटेंगी। यह अभियान पांढुर्णा के नौनिहालों के भविष्य की नई इबारत लिखने जा रहा है।

 विकास का रोडमैप

जिले के खजाने का हिसाब-किताब: कलेक्टर ने ली खनिज प्रतिष्ठान की क्लास, पाई-पाई का होगा जनहित में उपयोग

पांढुर्णा। जिले की धरती से निकलने वाले खनिज से प्राप्त राजस्व अब सीधे जनता की भलाई और विकास कार्यों में लगेगा। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) की अहम बैठक संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने की। बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि खनिज मद की राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत ही किया जाएगा।

​जिला खनिज अधिकारी महेश नगपुरे ने फंड में जमा राशि और नियमों का पूरा खाका पेश किया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह पैसा केवल तिजोरी में रखने के लिए नहीं है, बल्कि इससे जिले की तस्वीर बदलनी चाहिए। बैठक में विकास कार्यों की रूपरेखा तय की गई और रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति देने पर मंथन हुआ। इस बैठक से संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में खनिज मद से जिले में कई बड़े निर्माण और जनहितैषी कार्य देखने को मिल सकते हैं।

 औचक निरीक्षण

पशुपालन विभाग में हड़कंप: डिप्टी डायरेक्टर का अचानक छापा, सिराठा अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले तो सामने आई सच्चाई

पांढुर्णा। सरकारी दफ्तरों में काम-काज कैसा चल रहा है, इसकी हकीकत जानने के लिए छिंदवाड़ा से आए पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. एच.जी.एस. पक्षवार ने बुधवार को पांढुर्णा जिले का तूफानी दौरा किया। उनके अचानक धमकने से स्थानीय अमले में हड़कंप मच गया। डॉ. पक्षवार ने न केवल पांढुर्णा बल्कि सिराठा पशु चिकित्सालय का भी बारीकी से निरीक्षण किया और रजिस्टरों की पन्ने पलट डाले।

​निरीक्षण के दौरान सिराठा में कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य (597) के मुकाबले उपलब्धि (414) कम पाई गई, जिस पर उन्होंने सुधार के निर्देश दिए। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि कर्मचारी अपनी जगहों पर मुस्तैद मिले। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि शासन की ‘क्षीरधारा’ जैसी योजनाओं का लाभ हर पशुपालक तक पहुंचना चाहिए। इस औचक निरीक्षण ने यह संदेश दे दिया है कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रेरणादायक सफर

खेती से कमाई का ‘जादुई’ मंत्र: 3 लाख कमाने वाला किसान अब कमा रहा 9 लाख, जानिए मोरेश्वर की सफलता का राज

पांढुर्णा। अगर आप सोचते हैं कि खेती घाटे का सौदा है, तो आपको सौंसर के किसान मोरेश्वर डांडवे से मिलना चाहिए। उन्होंने साबित कर दिया है कि सही तकनीक और प्राकृतिक खेती से तकदीर कैसे बदलती है। कभी रसायनिक खेती में उलझकर सालाना महज 3 लाख रुपये कमाने वाले मोरेश्वर आज 8 से 9 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। उनकी इस सफलता की कहानी पूरे जिले के किसानों के लिए एक मिसाल बन गई है।

​आत्मा परियोजना और कृषि विभाग की सलाह पर मोरेश्वर ने जहर मुक्त खेती अपनाई। उन्होंने बाजार की महंगी खाद छोड़ी और खुद जीवामृत, बीजामृत और वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरू किया। नतीजा यह हुआ कि लागत 1.5 लाख से घटकर 70 हजार पर आ गई और मुनाफा तीन गुना बढ़ गया। आज वे न केवल संतरा, हल्दी और काला आलू उगा रहे हैं, बल्कि वर्मी कम्पोस्ट और नीम पाउडर बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं। मोरेश्वर की कहानी बताती है कि ‘आत्मनिर्भर किसान’ का सपना हकीकत बन सकता है।

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