आखिर गीता क्लीनिक ही क्यों?” जानिए पांढुर्णा के 200 झोलाछापों और ‘पांढुर्णा वॉच’ की मुहिम का पूरा सच!

पांढुर्ना वॉच| पिछले कुछ दिनों से पांढुर्णा की सड़कों, चौराहों और सोशल मीडिया पर एक सवाल बड़ी तेजी से तैर रहा है— “पांढुर्णा में 200 से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर हैं, तो फिर ‘पांढुर्णा वॉच’ सिर्फ ग्राम सिवनी के ‘गीता क्लीनिक’ और डॉ. आर. एन. बिस्वास के पीछे ही क्यों पड़ा है?” यह सवाल बिल्कुल जायज है और एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपका यह पूछना आपका अधिकार भी है।

​’पांढुर्णा वॉच’ जनता के इस सवाल का खुले दिल से स्वागत करता है। हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारी लड़ाई किसी एक व्यक्ति विशेष या एक क्लीनिक से नहीं है। हमारी लड़ाई उस खोखले और लचर सिस्टम से है, जो इन झोलाछापों को ग्रामीणों की जान से खेलने का मौन संरक्षण देता है। आइए, आज 6 तार्किक और बेबाक बिंदुओं के माध्यम से यह समझते हैं कि गीता क्लीनिक ही क्यों हमारा पहला ‘टारगेट’ बना और कैसे यह पांढुर्णा की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे बड़ा ‘लिटमस टेस्ट’ है:

1. पत्रकारिता हवा-हवाई बातों पर नहीं, पुख्ता साक्ष्यों (Evidence) पर होती है:

प्रशासन या कानून कभी भी केवल नाम छपने, अफवाहों या बिना सुबूत की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता। कानूनी कार्रवाई के लिए ठोस सबूतों की दरकार होती है। ‘गीता क्लीनिक’ के मामले में हमारे पास 100% पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं। पश्चिम बंगाल बोर्ड की 10वीं पास (थर्ड डिवीजन) की मार्कशीट यह चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि संबंधित व्यक्ति के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं है। जब सुबूत इतने मजबूत हों, तो उसी पर सबसे पहले प्रहार करना कानूनी रूप से सबसे सही कदम होता है, ताकि प्रशासन को कार्रवाई से बचने का कोई बहाना न मिले।

2. बेबस विधवा का दर्द और 80 हजार रुपये की बर्बादी का ‘जीवित प्रमाण’:

हमारे पास सिर्फ कागजी सबूत नहीं हैं, बल्कि प्रशासन के सामने खड़ी एक जीवित पीड़िता है। ग्राम सिवनी की गरीब और विधवा महिला कुसुम उकार जी ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि डॉक्टर द्वारा लगाए गए एक ‘जहरीले’ इंजेक्शन के कारण उनकी कमर में भयंकर गठान बन गई, और नागपुर में उसे ठीक कराने में उनके 80 हजार रुपये बर्बाद हो गए। बिना किसी पीड़ित की शिकायत के प्रशासन हमेशा पल्ला झाड़ लेता है। कुसुम जी का दर्द वह सबसे बड़ा आधार है, जिसे हम न्याय के लिए ढाल बना रहे हैं।

3. कैमरे के सामने खुद ‘मसीहा’ का ऑन-कैमरा कुबूलनामा:

प्रशासनिक जांच के दौरान मीडिया के कैमरों के सामने खुद कथित डॉक्टर ने यह सरेआम कुबूल किया है कि उनके पास एलोपैथी का कोई लाइसेंस नहीं है और वे 35 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। जब एक व्यक्ति स्वयं ही अवैध मेडिकल प्रैक्टिस की बात स्वीकार कर रहा है, तो इससे बड़ा कोई सबूत नहीं हो सकता। इतने बड़े कुबूलनामे के बावजूद क्लीनिक को तुरंत सील न करना, पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

4. ‘गीता क्लीनिक’ एक लिटमस टेस्ट है (असली निशाना 200 झोलाछाप हैं):

यही वह सबसे अहम कारण है जिसे हर पांढुर्णा वासी को आज समझना चाहिए। गीता क्लीनिक हमारे लिए और प्रशासन के लिए एक ‘टेस्ट केस’ है। जरा सोचिए! जब एक मामले में कथित डॉक्टर खुद कैमरे पर अवैध प्रैक्टिस कुबूल कर रहा है, 10वीं पास की डिग्री सार्वजनिक हो चुकी है, पीड़ित महिला सामने खड़ी है, फिर भी प्रशासन इतनी ढिलाई बरत रहा है (जैसे- जांच के वक्त दवाइयां रातों-रात गायब हो जाना और पंचनामे की कॉपी छिपाना)। तो क्या यह प्रशासन उन बाकी 199 झोलाछापों पर कोई कार्रवाई करेगा जिनके खिलाफ अभी कोई ठोस सबूत ही नहीं है? अगर हम इस 100% सबूत वाले क्लीनिक पर वैधानिक ताला लगवाने में सफल होते हैं, तो बाकी झोलाछापों की दुकानें खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगी। यह 200 झोलाछापों को साफ और सीधी चेतावनी है।

5. व्यवस्था की पोल खोलने का सबसे मजबूत जरिया:

हमारा उद्देश्य केवल एक गीता क्लीनिक बंद कराना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की उस ‘चुनिंदा कार्रवाई’ की पोल खोलना है जिसके तहत जांच से पहले ही क्लीनिक के बोर्ड पुत जाते हैं और साक्ष्य मिटा दिए जाते हैं। यह रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि हम प्रशासन की हर ढिलाई और हर ‘सेटिंग’ पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

6. ‘पांढुर्णा वॉच’ की खुली अपील: आप सबूत दें, हम लड़ेंगे!

हम स्पष्ट कर दें कि ‘गीता क्लीनिक’ हमारी मुहिम का अंत नहीं, बल्कि एक शुरुआत है। हमारी नजर पांढुर्णा ब्लॉक के उन तमाम 200 अवैध क्लीनिकों पर है जो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ‘पांढुर्णा वॉच’ पांढुर्णा की जागरूक जनता से अपील करता है कि यह सिर्फ हमारी लड़ाई नहीं है, यह आपके स्वास्थ्य की लड़ाई है। यदि आपके पास आपके गांव या वार्ड के किसी भी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस सबूत (गलत इलाज की पर्ची, कोई वीडियो, या नुक़सान का रिकॉर्ड) है, तो उसे बेखौफ होकर ‘पांढुर्णा वॉच’ से साझा करें। हम वादा करते हैं, हमारी अगली ‘महा-पड़ताल’ उसी क्लीनिक की होगी!

जनहित में वैधानिक उद्घोषणा (Statutory/Legal Disclaimer):

यह समाचार/रिपोर्ट पूर्णतः ‘पांढुर्णा वॉच’ की जमीनी पड़ताल, प्राप्त पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों, ऑन-कैमरा दर्ज बयानों और पीड़ितों की वास्तविक शिकायतों पर आधारित है। इस खबर का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष, चिकित्सा अधिकारी या संस्था को व्यक्तिगत या दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाना नहीं है, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ के नागरिक अधिकार की रक्षा हेतु प्रशासन की जवाबदेही तय करना और व्यवस्था में पारिदर्शिता लाना है। यह मुहिम पूरी तरह से भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनहित की निष्पक्ष पत्रकारिता के मापदंडों के अंतर्गत संचालित है।

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