ऑपरेशन सौंसर’: जब नागपुर के शातिर चोरों पर काल बनकर टूटी पुलिस, सूने घर को निशाना बनाने वालों का ऐसे हुआ ‘गेम ओवर’!

पांढुर्ना| रात का गहराता सन्नाटा, ताला लगा हुआ एक सूना मकान और अंधेरे को चीरते हुए दबे पाँव आते शातिर अपराधी… अक्सर ऐसी कहानियों का अंजाम आम आदमी की जीवन भर की गाढ़ी कमाई लुटने के साथ होता है। लेकिन, कहानी का अंत तब पलट जाता है जब रक्षक अपनी पूरी ताकत और बुद्धिमत्ता के साथ मैदान में उतरते हैं। पांढुर्णा जिले के सौंसर में ठीक ऐसा ही हुआ। पुलिस अधीक्षक (SP) महोदय श्री प्रकाश परिहार एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) श्रीमती प्रियंका पांडे के कुशल निर्देशन तथा थाना प्रभारी सौंसर निरीक्षक रुपलाल उईके के नेतृत्व में जहाँ अपराधियों ने सोचा था कि वे एक ‘परफेक्ट क्राइम’ करके आसानी से सीमा पार (महाराष्ट्र) निकल जाएंगे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे खाकी वर्दी के बिछाए एक ऐसे चक्रव्यूह में कदम रख चुके हैं, जहाँ से बचने का कोई रास्ता नहीं था। यह सिर्फ एक चोरी सुलझाने की खबर नहीं है, बल्कि यह कहानी है हमारी पुलिस के उस अदम्य साहस, पैनी नजर और अचूक रणनीति की, जिसने अपराधियों के मंसूबों को चंद दिनों में ही खाक में मिला दिया।

अपराध से अंजाम तक: एक रियल लाइफ थ्रिलर

​12 और 13 मई 2026 की दरमियानी रात, सौंसर के विट्ठल मंदिर के पास रहने वाले आदित्य तूपकर के घर का ताला टूटा। जब सुबह परिवार ने घर को अस्त-व्यस्त देखा और जेवरात-नगदी गायब पाए, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस घटना को एक चुनौती के रूप में लिया। मामला सिर्फ चोरी का नहीं था, बल्कि आम जनता के उस भरोसे का था, जो वे पुलिस की वर्दी पर करते हैं। थाना प्रभारी रुपलाल उईके के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन हुआ और फिर शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्लोज डाउन’। पुलिस ने पुराने ढर्रे पर काम करने के बजाय आधुनिक तकनीक और जमीनी नेटवर्क का ऐसा कॉकटेल तैयार किया कि अपराधी नागपुर में छिपकर भी खुद को बचा नहीं पाए।

इस शानदार ‘ऑपरेशन’ के 5 विशेष बिंदु, जो इसे बनाते हैं खास:

 टेक्नोलॉजी और ह्यूमन इंटेलिजेंस का घातक प्रहार:

पुलिस ने हवा में तीर नहीं चलाए। साइबर सेल की तकनीकी दक्षता, सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख और मुखबिरों (Informers) के सटीक नेटवर्क का ऐसा त्रिकोण बनाया गया कि अपराधियों की हर डिजिटल और भौतिक पदचाप पुलिस के रडार पर आ गई।

अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़:

यह कोई आम लोकल चोरों का काम नहीं था। गिरफ्तार किए गए अफरोज (24), संघर्ष (18) और मन (19) सभी नागपुर (महाराष्ट्र) के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। एक राज्य से आकर दूसरे राज्य में वारदात कर फरार होने वाले इस गिरोह को पकड़ना पुलिस की बड़ी रणनीतिक जीत है।

 शत-प्रतिशत रिकवरी (माल की वापसी):

क्राइम रिपोर्टिंग में अक्सर देखा जाता है कि अपराधी पकड़े जाते हैं, लेकिन माल खुर्द-बुर्द हो जाता है। यहाँ पुलिस की तेजी देखिए— ₹3,64,180/- का पूरा मशरूका (जिसमें सोने-चांदी के जेवर, 1.5 लाख की स्कूटी और यहाँ तक कि चोरी किया गया फ्रिज भी शामिल है) ज्यों का त्यों बरामद कर लिया गया।

 भविष्य के खतरों पर भी नकेल:

पुलिस की जांच यहीं नहीं रुकी। कड़ाई से पूछताछ में टीम ने गिरोह के चौथे साथी आयुष शेंडे का भी पता लगा लिया, जो वर्तमान में वर्धा के बाल सुधार गृह में है। उस पर भी पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है, ताकि यह गिरोह दोबारा सिर न उठा सके।

 टीम वर्क की बेमिसाल मिसाल:

यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पुलिस टीम के हर उस सदस्य की है जिसने इस केस को सुलझाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। इस शानदार ‘टीम वर्क’ में हर पुलिसकर्मी ने अपनी भूमिका को एक मशीन के पुर्जों की तरह सटीकता से निभाया।

निष्कर्ष: सुकून की नींद सो सकता है शहर

​जब प्रशासन सतर्क हो और पुलिस के इरादे लोहे की तरह मजबूत हों, तो कोई भी अपराधी कानून की नजरों से बच नहीं सकता। सौंसर पुलिस की इस त्वरित और स्मार्ट वर्किंग ने न केवल फरियादी के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है, बल्कि पूरे क्षेत्र के नागरिकों को यह विश्वास दिलाया है कि वे सुरक्षित हाथों में हैं। अपराधियों के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि यदि वे इस क्षेत्र की ओर आँख भी उठाएंगे, तो अंजाम सलाखों के पीछे ही होगा। खाकी वर्दी के इस जज्बे और समर्पण को सलाम!

इस सराहनीय खुलासे में इनकी रही विशेष भूमिका:

इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी सौंसर निरी. रुपलाल उईके के साथ उपनिरीक्षक प्रहलाद बैरागी, आरक्षक 544 अखिलेश प्रताप सिंह, आरक्षक 473 मनीष टेमरे, आरक्षक 1511 राजेन्द्र चौरिया, महिला आरक्षक 1005 लता कंगाली और साइबर सेल के आरक्षक 149 अखिलेश हिंगवे की अत्यंत सराहनीय भूमिका रही।

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