पांढुर्णा पुलिस की शानदार और त्वरित कार्रवाई: नाबालिग से जुड़े गंभीर मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार, पुलिस प्रशासन की हो रही चौतरफा प्रशंसा

 

पांढुर्ना समाज को सुरक्षित रखने और अपराधियों के मन में कानून का खौफ बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यकुशलता और तत्परता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। पांढुर्णा जिले के पुलिस अधीक्षक श्री प्रकाश परिहार के कड़े और कुशल निर्देशन तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सौंसर, सुश्री प्रियंका पाण्डेय के संवेदनशील मार्गदर्शन में, पुलिस ने एक नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले को महज कुछ ही दिनों में सुलझा कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। उच्च अधिकारियों की इस सजगता और त्वरित निर्णय क्षमता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पांढुर्णा पुलिस नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध है और अपराधों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

पुलिस प्रशासन की सफलता के 5 प्रमुख बिंदु:

1. शिकायत मिलते ही पुलिस का त्वरित और संवेदनशील एक्शन

दिनांक 17 जून 2026 को जैसे ही परिजनों ने थाना सौंसर में नाबालिग के बिना बताए चले जाने की सूचना दी, पुलिस ने तनिक भी विलंब किए बिना अपराध क्रमांक 250/2026 और बीएनएस की धारा 137(2) के तहत तुरंत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस की इसी आरंभिक मुस्तैदी ने आगे की पूरी कार्रवाई की मजबूत नींव रखी और अपराधियों को भागने का मौका नहीं दिया।

2. सुरक्षित माहौल में जांच और सख्त धाराओं का इजाफा

दिनांक 20 जून को जब पीड़िता परिजनों के साथ वापस आई, तो पुलिस ने अत्यंत संवेदनशीलता का परिचय दिया। बड़े ही सुरक्षित और आत्मीय माहौल में पूछताछ की गई, जिससे पीड़िता बिना किसी डर के अपनी बात रख सकी। बयानों के आधार पर बिना किसी देरी के मामले में पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की सख्त धाराएं (बीएनएस 64(2)m, 65(1) एवं पॉक्सो एक्ट 5(L), 6) जोड़ी गईं, जो पुलिस की न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

3. 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने दिन-रात एक कर दिया और अपने मुखबिर व सूचना तंत्र को सक्रिय करते हुए अगले ही दिन (21 जून को) मुख्य आरोपी विनोद उपासे (26 वर्ष, निवासी बडोसा) को गिरफ्तार कर लिया। इतनी तीव्र गति से की गई यह गिरफ्तारी पुलिस की जमीनी पकड़ का शानदार उदाहरण है।

4. अपराध में सहयोग करने वालों पर भी कड़ा प्रहार

पुलिस की विवेचना केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं रही, बल्कि जड़ तक गई। गहन जांच में यह तथ्य सामने आया कि मोहम्मद जिब्राईल (55 वर्ष) और नूरजहाँ बेगम (60 वर्ष) ने इस घिनौने कृत्य के लिए कमरा उपलब्ध कराकर सहयोग किया था। पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए 22 जून को इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया और उन पर भी पॉक्सो एक्ट की धारा 17/18 एवं बीएनएस की धारा 49 के तहत कड़ी कार्रवाई की।

5. आम जनता में पुलिस के प्रति बढ़ा विश्वास

इस पूरे घटनाक्रम में पांढुर्णा पुलिस ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि पुलिस प्रशासन सक्रिय हो, तो कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। ‘सक्रिय पुलिस – सुरक्षित समाज’ का नारा इस मामले में पूरी तरह चरितार्थ हुआ है। इस त्वरित न्यायपूर्ण कार्रवाई के बाद से आम जनता के बीच पुलिस की छवि और भी अधिक मजबूत और विश्वसनीय हुई है।

इनकी रही महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका:

उच्च अधिकारियों के निर्देशों को जमीनी स्तर पर कुशलतापूर्वक लागू करने और अपराधियों को तत्परता से पकड़ने में थाना प्रभारी सौंसर, निरीक्षक श्री रुपलाल उईके की नेतृत्व क्षमता अत्यंत सराहनीय रही। इसके साथ ही, मामले में पीड़िता से संवेदनशीलता से पूछताछ करने वाली महिला पुलिस अधिकारी और थाना सौंसर पुलिस टीम के सभी जवानों व पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन सभी की दिन-रात की अथक मेहनत से ही इस जटिल मामले का इतनी जल्दी पर्दाफाश हो सका। आम जनता इन सभी पुलिसकर्मियों के जज्बे को सलाम कर रही है

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