सिराठा पंचायत में न्याय का ‘दोहरा पैमाना’—लाखों की नाली ढहने पर जिम्मेदार ‘मौन’ और ठेकेदार पर मेहरबानी

पांढुर्ना वॉच पांढुर्णा जिले की सिराठा ग्राम पंचायत में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की गुणवत्ता अब गहरे संदेह के घेरे में है। एक आदर्श पंचायत से यह अपेक्षा होती है कि वह जनहित और सरकारी धन की सुरक्षा के लिए बिना किसी भेदभाव के कार्य करे। लेकिन, सिराठा में एक बेहद चौंकाने वाला विरोधाभास सामने आया है। पंचायत का एक धड़ा जहां कथित चोरी के एक मामले में अत्यधिक तत्परता दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई करता है, वहीं दूसरी ओर 4.23 लाख रुपये की लागत से बनी सरकारी नाली के ढह जाने पर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी ‘अज्ञानता’ का चोला ओढ़ लेते हैं। यह स्थिति न केवल व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, बल्कि पंचायत के भीतर चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक बड़े और सुसंगठित ढांचे (System) की ओर भी स्पष्ट इशारा करती है।

​कानूनी और प्रशासनिक मापदंडों के आधार पर सिराठा ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़े करने वाले छह प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. ‘मुझे जानकारी नहीं’—सचिव का यह बयान या प्रशासनिक दिवालियापन?:

इस पूरे प्रकरण का सबसे विचलित करने वाला पहलू ग्राम पंचायत सचिव, आदरणीय विजेंद्र धुर्वे का वह आधिकारिक बयान है, जिसमें उन्होंने कहा है कि “उन्हें नाली टूटने की जानकारी नहीं है।” यह महज एक गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह पंचायत की मॉनिटरिंग व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने का प्रमाण है। एक जिम्मेदार अधिकारी, जिसके अधिकार क्षेत्र और हस्ताक्षर से लाखों रुपये के बिल पास होते हैं, उसका अपने ही क्षेत्र में (वह भी रोजगार सहायक के घर के समीप) हुए इतने बड़े नुकसान से अनभिज्ञ होने का दावा करना प्रथम दृष्टया हास्यास्पद और संदेहास्पद प्रतीत होता है। यह बयान स्पष्ट करता है कि या तो मैदानी स्तर पर अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं है, या फिर यह जवाबदेही से बचने की एक सोची-समझी रणनीति है।

2. लाखों का निर्माण और पहली बारिश की ‘गवाही’ (गुणवत्ता पर सवाल):

लगभग तीन माह पूर्व 4.23 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से निर्मित सीमेंट कंक्रीट नाली का एक बड़ा हिस्सा पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सका। कंक्रीट का इस तरह टूटकर बिखरना सीधे तौर पर यह प्रमाणित करता है कि निर्माण में निर्धारित तकनीकी मापदंडों, गुणवत्तापूर्ण सीमेंट और आवश्यक सरिये (Rebar) का घोर अभाव था। यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव-निर्मित तकनीकी विफलता का स्पष्ट मामला है।

3. जवाबदेही का अभाव और ठेकेदार को अघोषित ‘अभयदान’:

सरकारी संपत्ति को पहुंचे इस स्पष्ट नुकसान के बावजूद, पंचायत द्वारा संबंधित निर्माण एजेंसी या ठेकेदार को कोई आधिकारिक ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-Cause Notice) जारी न करना प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। जनचर्चाओं के अनुसार, ठेकेदार को गुपचुप तरीके से बिना किसी अर्थदंड के सुधार कार्य करने का अवसर दिया जा रहा है। आधिकारिक कार्रवाई के बिना यह छूट देना, वस्तुतः साक्ष्यों को मिटाने और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने जैसी प्रक्रिया प्रतीत होती है।

4. कार्रवाई में स्पष्ट ‘दोहरा मापदंड’ (Selective Action):

एक ही ग्राम पंचायत में न्याय के दो अलग-अलग पैमाने लागू हैं। जब एक स्थानीय पंच द्वारा कथित तौर पर ट्यूबवेल का 100 फीट केबल काटने का मामला सामने आता है, तो सरपंच महोदया स्वयं नांदनवाड़ी पुलिस चौकी पहुंचकर त्वरित शिकायत दर्ज कराती हैं। पंचायत का यह कदम जनहित में है, परंतु ठीक इसी तर्ज पर 4.23 लाख रुपये की नाली भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने पर पंचायत द्वारा ठेकेदार पर FIR तो दूर, एक नोटिस तक जारी न करना, उनकी कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

5. आंगनबाड़ी निर्माण: कागजों पर पूर्ण, धरातल पर अधूरा (कथित वित्तीय गबन):

सिराठा पंचायत में अनियमितताओं का इतिहास केवल वर्तमान घटनाओं तक सीमित नहीं है। पूर्व सचिव के कार्यकाल से जुड़े आंगनबाड़ी भवन निर्माण का मुद्दा भी अब सतह पर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भवन का निर्माण कार्य आधा-अधूरा होने के बावजूद इसके लिए आवंटित पूरी राशि का आहरण कर लिया गया है। बिना कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) और भौतिक सत्यापन के पूरी राशि का निकल जाना, सीधे तौर पर सरकारी धन के कथित गबन का एक गंभीर मामला है।

6. उच्च स्तरीय ‘तकनीकी और वित्तीय ऑडिट’ की अनिवार्यता:

सिराठा ग्राम पंचायत में एक के बाद एक सामने आ रहे इन तीनों बड़े प्रकरणों—नाली निर्माण में तकनीकी विफलता, जल आपूर्ति केबल प्रकरण और पुराने आंगनबाड़ी भवन के फंड का कथित गबन—ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत स्तर पर जांच से काम नहीं चलेगा। अब यह नितांत आवश्यक है कि अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और जिला पंचायत CEO तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करें। एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय टीम द्वारा पंचायत के पिछले और वर्तमान कार्यों का ‘तकनीकी और वित्तीय ऑडिट’ (Technical and Financial Audit) सुनिश्चित किया जाए।

डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह समाचार रिपोर्ट ग्राउंड जीरो से प्राप्त दृश्य प्रमाणों (तस्वीरों/वीडियो), स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारियों, जनचर्चाओं और संबंधित अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों के आधार पर जनहित में तैयार की गई है। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और सरकारी धन के सदुपयोग को सुनिश्चित करना है। हमारा उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की मानहानि करना नहीं है। यदि इस रिपोर्ट में उल्लिखित किसी भी पक्ष (पंचायत प्रतिनिधि, ठेकेदार या अधिकारी) को अपना पक्ष रखना है, तो पत्रकारिता के स्थापित मानदंडों के अनुरूप उनका स्वागत है और उनके आधिकारिक पक्ष को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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