राष्ट्रगौरव का महाउत्सव! पांढुर्णा में गूंजेगा ‘वंदे मातरम’ का जयघोष, 150वीं वर्षगांठ की भव्य तैयारी!

पांढुर्ना |भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के रचना के 150 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, और इस ऐतिहासिक क्षण को पूरा देश एक भव्य उत्सव के रूप में मनाएगा! मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में भी इस राष्ट्रगौरव के महाउत्सव के लिए विशेष कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गई है, जो पूरे एक साल तक, 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक चार चरणों में आयोजित किए जाएंगे।

​ पांढुर्णा में मुख्य आयोजन – 7 नवंबर 2025

​उत्सव की शुरुआत पांढुर्णा में 7 नवंबर 2025 को होगी, जब पूरा जिला राष्ट्रीय गीत के सम्मान में एकजुट होगा:

  • समय और स्थान: सुबह 09:30 बजे नगर पालिका परिषद परिसर, पांढुर्णा।
  • मुख्य आकर्षण: इस अवसर पर ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन एक भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें हजारों लोग एक साथ राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे।
  • प्रधानमंत्री का संबोधन: इसके तुरंत बाद, सुबह 10:00 बजे से नई दिल्ली से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा जाएगा।

​इसके अलावा, 8 नवंबर 2025 को यह सामूहिक गायन जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर होगा, और 10 नवंबर 2025 को नगरीय निकायों में भी ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई देगी। पांढुर्णा कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देशन में इन आयोजनों की सफलता के लिए अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

​ ‘वंदे मातरम’: एक संक्षिप्त इतिहास

​’वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अमर मंत्रघोष है, जिसने लाखों स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया।

  • रचना: इस कालजयी गीत की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1876 को संस्कृत और बांग्ला भाषा के मिश्रण से की थी।
  • प्रकाशित: यह गीत पहली बार उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ (1882) में शामिल हुआ।
  • जन-जन की आवाज़: यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांति का सबसे शक्तिशाली प्रतीक बन गया।
  • सर्वप्रथम गायन: इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वरबद्ध कर गाया था।
  • राष्ट्रगीत: 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत का राष्ट्रगीत घोषित किया।

मातृभूमि के प्रति प्रेम और गौरव का यह गीत आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की लौ जलाए रखता है।

​पांढुर्णा जिले का यह वर्षव्यापी आयोजन नई पीढ़ी को राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व से जोड़ने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर है।

और पढ़ें

और पढ़ें