July 5, 2026 12:52 am

पांढुर्णा मंडी का नया ड्रामा: ‘कटौती किंग’ का 1 किलो वाला ‘जादू’

 मंडी प्रशासन की ‘नेत्रहीनता’: अधिकारी 100 बोरी में 50 किलो चोरी पर भी ‘शांत मुद्रा’ में!

पांढुर्ना|ब्रेकिंग न्यूज़! पांढुर्णा मंडी में आजकल मक्का नहीं, गणित का नया पाठ्यक्रम तौला जा रहा है। यहां के ‘कटौती किंग’ (कुछ व्यापारी) और उनके वफादार गुर्गे, किसानों की उपज से खुली लूट मचा रहे हैं, और मंडी प्रशासन के आला अधिकारीगण शायद इन दिनों ‘ध्यान योग’ में लीन हैं, इसलिए उनका ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं जा रहा है।

​आइए, मिलते हैं इस ड्रामे के मुख्य किरदारों से और समझते हैं यह ‘1 किलो वाला चमत्कार’

 मुख्य किरदार: ‘कटौती किंग’ और उनकी टोली

​पांढुर्णा मंडी में ‘कटौती किंग’ (व्यापारी) का एक ही सिद्धांत है: बोरी जितनी हल्की, मुनाफा उतना भारी!

  • बोरी का वजन: 500 ग्राम।
  • किंग की मांग: 1 किलो वजन काटो!
  • मुनाफा: ‘कटौती किंग’ को प्रति बोरी सीधा 500 ग्राम शुद्ध मक्का मुफ्त में मिल जाता है।

​यह सिलसिला एक-दो नहीं, बल्कि सैंकड़ों बोरियों पर चलता है। किसान जब सवाल करता है तो उसे डांटकर शांत करा दिया जाता है। इस गणित को देखकर तो लगता है कि ये व्यापारी नहीं, बल्कि एकाधिकार प्राप्त ‘वजन ग्राहीता ‘ हैं, जिन्हें मंडी प्रशासन ने खुली छूट दे रखी है।

 दूसरा किरदार: ‘धर्मी सेठ’ का दान

​’कटौती किंग’ का साथ देते हैं ‘धर्मी सेठ’ (उनके मुंशी)। इनका काम है बोरी तौलने के बाद, 200 ग्राम मक्का अलग से बटोरना।

  • सेठ का तर्क: “भाईसाहब, यह ‘धर्मी’ है, दान करना सीखो!”
  • किसान का सवाल: “यह किस धर्म का दान है, सेठ जी?”
  • जवाब: “अरे! यह मंडी के गुप्त खजाने को भरने का धर्म है, सवाल मत करो!”

​किसानों को बिना कोई विकल्प दिए, प्रति बोरी 200 ग्राम अतिरिक्त मक्का देना ही पड़ता है, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं होता। यह ‘धर्मी’ मक्का जाता कहां है, इस पर मंडी के आला अधिकारीगण पूरी तरह ‘मौन व्रत’ धारण किए हुए हैं।

 आला अधिकारी: ‘सोने से पहले की चुप्पी’

​मंडी के जो आला अधिकारी पूरे बाजार की निगरानी के लिए बैठे हैं, उनका ध्यान इस लूट की ओर बिल्कुल नहीं जा रहा है

  • ​क्या वे नहीं जानते कि 500 ग्राम की बोरी पर 1 किलो काटना खुलेआम चोरी है?
  • ​क्या उन्हें नहीं पता कि 200 ग्राम ‘धर्मी’ लेना पूरी तरह अवैध है?

​शायद मंडी के अधिकारी ‘अदृश्य तराजू’ से तौल की निगरानी कर रहे हैं, जो केवल उन्हें ही दिखाई देता है। या हो सकता है कि उन्होंने अपनी कुर्सी पर बैठने से पहले ‘आँखें बंद रखने की शपथ’ ली हो।

मंडी प्रशासन के आला अधिकारीगण, कृपया अपनी आँखों पर बंधी पट्टी खोलिए! जब तक आप ‘कटौती किंग’ और ‘धर्मी सेठ’ के इस गैर-कानूनी ड्रामा पर रोक नहीं लगाएंगे, तब तक पांढुर्णा मंडी, किसानों की जेब काटने का केंद्र बनी रहेगी!

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