
₹4.5 लाख के इस ‘वार्मथ टेंडर’ में छुपा है कौन सा रहस्य?
पांढुर्णा, छिंदवाड़ा। शीतलहर के खिलाफ नगर पालिका परिषद, पांढुर्णा की एक शानदार और गर्मजोशी भरी पहल ने न केवल शहरवासियों का ध्यान खींचा है, बल्कि प्रशासन के गलियारों में एक रोमांचक फुसफुसाहट भी पैदा कर दी है। यह पहल है – शहर के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव (Bonfires) जलाने के लिए जलाऊ लकड़ी की आपूर्ति का टेंडर!
एक ओर जहां यह खबर बेहद सकारात्मक है, वहीं निविदा के कुछ आंकड़े इसे एक ‘सस्पेंस थ्रिलर’ का रूप दे रहे हैं।
1. वार्मथ का बजट: ₹7,500 प्रतिदिन!
नगर पालिका परिषद (Nagar Palika Parishad) ने इस नेक काम के लिए जो अनुमानित खर्च (Probable Amount of Contract – PAC) तय किया है, वह है: पूरे ₹4,50,000/- (चार लाख पचास हजार रुपये!)।
चूंकि यह टेंडर मुख्य रूप से 2 महीने (लगभग 60 दिन) के लिए जारी किया गया है, तो सरल गणित बताता है कि नगर पालिका परिषद हर दिन अलाव की लकड़ी पर औसतन: ₹7,500/- प्रतिदिन का यह बजट, शहर के महत्वपूर्ण चौराहों और स्थानों पर नागरिकों को कड़कड़ाती ठंड से बचाने की तैयारी को दर्शाता है।
2. संदेह की चादर: क्या यह सिर्फ लकड़ी का दाम है?
यहीं पर रोचक मोड़ आता है। ₹7,500/- प्रति दिन का यह आंकड़ा कई लोगों को चौंका रहा है। लकड़ी की गुणवत्ता, उसका परिवहन, और उसे सही स्थान पर पहुंचाने का श्रम शुल्क इसमें शामिल है, लेकिन क्या यह राशि केवल इन्हीं खर्चों को कवर करेगी?
निविदा के दस्तावेज़ बताते हैं कि इस काम को पाने के लिए ठेकेदार को सरकारी विभाग में पंजीकृत होना ज़रूरी है। साथ ही, बोली लगाने के लिए ठेकेदार को ₹10,000/- की सुरक्षा राशि भी जमा करनी होगी।
सवाल यह है: यह टेंडर सिर्फ जलाऊ लकड़ी की आपूर्ति का है, या फिर इस “वार्मथ” पैकेज में कुछ “अदृश्य खर्चे” भी शामिल हैं, जिसके कारण बजट इतना मोटा रखा गया है? क्या ₹4.5 लाख का यह ठेका, लकड़ी के व्यापार से जुड़े किसी खास व्यक्ति या समूह के लिए किस्मत का दरवाज़ा खोलने वाला है?
3. कौन होगा इस ‘आग’ का भाग्यशाली ठेकेदार?
शहर में हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि इस महत्वपूर्ण और मलाईदार ठेके का ‘कोड’ कौन अनलॉक करेगा।
नगर पालिका ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बोली लगाने वाले की दर अगर अनुमानित राशि से 10% से ज्यादा कम होती है, तो उसे एक अतिरिक्त सुरक्षा गारंटी जमा करनी होगी। यह शर्त सुनिश्चित करती है कि कोई भी ठेकेदार, काम की गुणवत्ता से समझौता किए बिना, सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए बाजार दर को जरूरत से ज्यादा न गिराए।
इस ₹4.5 लाख के ‘सीक्रेट’ टेंडर को ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि 12 दिसंबर 2025 है, लेकिन असली विजेता का नाम तो 15 दिसंबर 2025 को निविदाएं खुलने के बाद ही पता चलेगा।
पूरे शहर की निगाहें अब नगर पालिका परिषद पर टिकी हैं—कि कौन सा भाग्यशाली ठेकेदार इन ₹7,500/- प्रतिदिन की आग को शहर के कोने-कोने तक पहुँचाकर, पांढुर्णा की इस सर्दी को सबसे यादगार और गरमा-गरम बना देगा!

