आदरणीय बाबासाहेब अंबेडकर पर ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’: पार्षद दुर्गेश उईके के खिलाफ BNS की धारा 299 के तहत FIR
पांढुर्णा,– पांढुर्णा में एक स्थानीय पार्षद द्वारा सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जवाहर वार्ड के पार्षद दुर्गेश उईके के खिलाफ आदरणीय डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के सम्मान में अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है।
पांढुर्णा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 299 के तहत विधिवत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) पंजीकृत की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला एक फेसबुक पोस्ट से जुड़ा है।
- घटना की शुरुआत: शिकायत के अनुसार, दिनांक 28/11/2025 को पार्षद दुर्गेश उईके ने अपनी फेसबुक आईडी पर एक टिप्पणी की।
- आपत्ति का विषय: यह टिप्पणी आदरणीय बाबासाहेब अंबेडकर के बारे में थी, जिसमें ऐसे वाक्यांशों का उल्लेख था जिससे उनके अनुयायियों की भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा। इसमें कथित तौर पर संविधान से संबंधित विवादास्पद बातें भी शामिल थीं।
- शिकायत: नीलकंठ निवासी सिद्धार्थ बागडे ने अपने साथियों के साथ मिलकर 01/12/2025 को पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी से उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है और यह समाज में गलत संदेश दे रही है।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी आधार
शिकायत मिलने के तुरंत बाद, पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा।
- FIR का पंजीकरण: पुलिस ने पाया कि कथित टिप्पणी प्रथम दृष्ट्या ही आपत्तिजनक है और धारा 299 BNS के तहत संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती है। यह धारा समाज के किसी वर्ग की भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाने से संबंधित है।
- विवेचना शुरू: FIR दर्ज होने के साथ ही पांढुर्णा पुलिस ने मामले की विवेचना (जांच) शुरू कर दी है। जांच दल अब डिजिटल साक्ष्यों (फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट) की प्रामाणिकता की जांच करेगा।
विशेषज्ञों का मत: कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि BNS की धारा 299 के तहत यह मामला काफी मजबूत है, खासकर जब टिप्पणी देश के संविधान निर्माता के सम्मान से जुड़ी हो। एक जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसा कृत्य किए जाने के कारण इस मामले पर स्थानीय प्रशासन और जनता की गहरी नज़र है।
पांढुर्णा पुलिस जल्द ही पार्षद दुर्गेश उईके को जांच में शामिल होने के लिए बुला सकती है और आगे की दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है। यह घटना सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।


