April 10, 2026 5:27 pm

पांढुर्णा में पतंग का जुनून VS. मौत का मांजा: उड़ती पतंगों के नीचे ‘साइलेंट किलर’ का जाल

पांढुर्णा। आसमान में पतंगों का मेला शुरू हो चुका है! हर छत और मैदान से ‘वो काटा!’ की आवाजें गूंज रही हैं। लेकिन इस पारंपरिक उत्साह के बीच, एक बेहद खतरनाक ‘खिलाड़ी’ चुपके से अपना जाल बिछा रहा है: चाइनीज मांजा

​ मांजा नहीं, स्टील का तार है यह

​पतंगबाजों की जुबान पर आज-कल सिर्फ एक ही बात है: “इससे अच्छी ‘धार’ किसी मांजे में नहीं।” लेकिन यही ‘धार’ अब शहर के लिए चिंता का कारण बन गई है। यह सिंथेटिक मांजा, जो नायलॉन या प्लास्टिक से बना होता है और काँच के बारीक चूरे के बजाय खतरनाक रासायनिक कोटिंग से लेपित होता है, इसे लगभग स्टील के तार जितना मजबूत बना देता है।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया: “मैंने देखा, एक कौवा उड़ते हुए इस मांजे की चपेट में आया, उसके पंख कट गए और वो सीधे नीचे गिर गया। यह मांजा जानवरों के लिए तो ज़हर है ही, इंसानों के गले को भी मिनटों में चीर सकता है।”

​ दोपहिया चालकों का ‘डर’

​पांढुर्णा की तंग गलियों और मुख्य सड़कों पर, शाम होते ही दोपहिया वाहन चालकों में एक अजीब सा डर बैठ जाता है। सड़क पर अचानक लटकते चाइनीज मांजे के कारण कई लोग मामूली रूप से घायल हो चुके हैं।

एक युवा राइडर का दर्द: “हम हेलमेट पहनते हैं, लेकिन यह मांजा इतना पतला और धारदार होता है कि अचानक गले या कान के पास आ जाता है। यह ऐसा लगता है जैसे किसी ने धारदार ब्लेड चला दिया हो। यह पतंगबाजी नहीं, जानलेवा खेल है।”

​ प्रतिबंध के बावजूद, दुकानें क्यों खामोश?

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस मांजे पर प्रतिबंध है, फिर भी यह खुलेआम कैसे बिक रहा है? स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने अभी तक किसी भी दुकान की गहन जाँच नहीं की है। प्रतिबंध सिर्फ कागज़ों पर है, जबकि मांजा आसानी से 100 से 200 रुपये में उपलब्ध है।

​स्थानीय नागरिक यह मांग कर रहे हैं कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे। क्योंकि जब तक प्रशासन की नज़र इन दुकानों पर नहीं पड़ेगी, तब तक पांढुर्णा में पतंगबाजी का यह रोमांच एक जानलेवा जोखिम बना रहेगा।

सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है, या इस पतंगबाजी के मौसम में चाइनीज मांजे के ‘साइलेंट किलर’ को रोकने के लिए तुरंत कोई कार्रवाई होगी?