पांढुर्णा ने सेना के वीरों को किया नमन: ‘झंडा दिवस’ पर दान की बहार, क्यों मिलती है आयकर में 100% छूट?

पांढुर्णा में सशस्त्र सेना झंडा दिवस (Armed Forces Flag Day) सोमवार, 8 दिसंबर 2025 को अत्यंत हर्षोल्लास और कृतज्ञता के साथ मनाया गया। नागरिकों ने सैनिकों के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा दर्शाते हुए इस नेक पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और झंडा दिवस निधि में उदारतापूर्वक दान दिया। इस दिन एकत्रित की गई यह महत्वपूर्ण राशि, युद्ध में दिव्यांग हुए सैनिकों, वीर नारियों, और देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के परिवारों के कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक जीवनरेखा का कार्य करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्तिगत और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा इस निधि में दिए गए दान पर आयकर अधिनियम की धारा 80 ‘जी’ बी के तहत शत-प्रतिशत आयकर छूट भी प्रदान की जाती है, जो इसे दान का एक आकर्षक और देशभक्तिपूर्ण माध्यम बनाती है। कार्यक्रम के दौरान, विंग कमांडर श्री देवेंद्र सिंह तोमर (से.नि.) और कल्याण संयोजक श्री राजेश पाटिल ने कलेक्टर एवं अध्यक्ष सैनिक बोर्ड पांढुर्णा, श्री नीरज कुमार वशिष्ठ को सशस्त्र सेना का झंडा बैज लगाकर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी और कल्याण संयोजक ने इस महान उद्देश्य में योगदान देने वाले सभी दानदाताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि राष्ट्र की सेवा में यह सामूहिक योगदान कितना महत्वपूर्ण है।
‘खुशियों की दास्तां’: 10 वर्षीय आनंद को मिला नया जीवन! पांढुर्णा प्रशासन की पहल से मुंबई में सफल CHD ऑपरेशन

पांढुर्णा के ग्राम धनोरा के 10 वर्षीय आनंद परतेती के जीवन में आशा की एक नई किरण जगी है, जिसकी गंभीर जन्मजात हृदय रोग (CHD) की बीमारी को सफल ऑपरेशन के बाद दूर कर दिया गया है। सांसद श्री विवेक बंटी साहू के दिशा-निर्देशन में आयोजित 100 दिवसीय स्वास्थ्य शिविर, जिसकी शुरुआत 2024 में हुई थी, के अंतर्गत आनंद का पंजीकरण कराया गया था। कलेक्टर पांढुर्णा, श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के सक्रिय मार्गदर्शन और डॉ. दीपेन्द्र सलामे (सीबीएमओ) के नेतृत्व में, डॉ. मिलिन्द गजभिये (शिशुरोग विशेषज्ञ) और आरबीएसके टीम के अथक प्रयासों से आनंद को जीवनदान मिला। उसका जटिल ऑपरेशन मुंबई के नारायण हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, एएनएम, आशा सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता, बीईई, बीपीएम, और बीसीएम की टीम ने निरंतर फॉलो-अप किया ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि उपचार पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हो। सफल ऑपरेशन के बाद आनंद के माता-पिता ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, इस बात पर जोर देते हुए कि यह कहानी न केवल स्वास्थ्य सेवा में सहयोग और समर्पण की मिसाल है, बल्कि यह उन बच्चों के लिए आशा और नई शुरुआत का प्रतीक भी बन गई है, जिनके लिए गंभीर बीमारी एक चुनौती पेश करती है।
401वीं जयंती पर लोधीखेड़ा में गूंजे ‘अभंग’: क्यों कहलाते हैं ‘संतु तेली’ के रचित भजन ‘पांचवां वेद’?

लोधीखेड़ा-नगर में सोमवार, 8 दिसंबर 2025 को संत शिरोमणि श्री संताजी जगनाडे महाराज की 401वीं जयंती तेली समाज द्वारा असाधारण उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। संत संताजी जगनाडे का जन्म 8 दिसंबर 1624 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के चाकण गांव में हुआ था। वह महान संत तुकाराम महाराज के प्रमुख अनुयायी थे और उन्हें ‘संतु तेली’ के नाम से भी जाना जाता था, क्योंकि वे जाति से तेली थे। संत संताजी की प्रसिद्धि का मुख्य कारण यह है कि उन्होंने संत तुकाराम द्वारा गाए गए अभंगों को लिपिबद्ध किया, और उनके द्वारा रचित अभंगों को ‘पांचवां वेद’ तक कहा जाता है। जयंती के अवसर पर, नगर के जगनाडे चौक, गोहटान पुरा से भव्य पालकी यात्रा निकाली गई, जो बाजार चौक पर पहुंची। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण एक बालक था जिसने संताजी की वेशभूषा धारण कर उनकी प्रतिकृति प्रस्तुत की। महिला एवं पुरुष भजन मंडलियों ने धार्मिक भजनों की प्रस्तुति से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यात्रा नगर भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंची, जहां तेली समाज के बंधुओं ने विशाल भंडारे का आयोजन किया, जिसमें समाज के लोगों और अन्य नागरिकों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
संत जगनाडे महाराज: 401वीं जयंती का भव्य आयोजन, क्यों बना संत जगनाडे भवन केंद्र?

संत शिरोमणि श्री संताजी जगनाडे महाराज की 401वीं जयंती का भव्य आयोजन सोमवार, 8 दिसंबर 2025 को तेली समाज संगठन द्वारा संत जगनाड़े भवन में संपन्न हुआ। यह आयोजन तेली समाज संगठन के अध्यक्ष श्री भूषण केवटे की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक किया गया, जिसमें समाज के कई प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया। इस अवसर पर समाज बंधुओं ने महान संत को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जो संत तुकाराम महाराज के अभंगों को लिपिबद्ध करने और समाज में धार्मिक चेतना जगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस आयोजन में श्री अशोक घाटोडे श्री भीमराव जी,साँबारे श्री शंकरजी भद्रे, श्री मनीष मेटाँगले, श्री हरीश रेवतकर, श्री योगराज वानोड़े, और श्री पवन बेलखड़े एवं मातृशक्ति सहित बड़ी संख्या में समाज की सक्रिय भागीदारी रही। संत जगनाडे भवन को इस आयोजन का केंद्र बनाया गया, जो समाज में उनके योगदान और उनकी विरासत को जीवित रखने के संकल्प को दर्शाता है। यह समारोह संत जगनाडे महाराज के जीवन मूल्यों, उनके अभंगों के महत्व और उनकी शिक्षाओं को याद करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।

