April 10, 2026 3:50 pm

पांढुर्ना में रचा जाएगा भक्ति का नया इतिहास: 127 हनुमान मंदिरों की नगरी में गूंजेगा ‘सनातन’ का जयघोष

24 को सोपान दादा की ‘गर्जना’ और 27 को 38 किमी की ‘साधना’

आस्था के महाकुंभ के लिए तैयार हुआ जिला

पांढुर्ना:

कहा जाता है कि जिस भूमि पर हनुमान जी की कृपा हो, वहाँ संकट फटक भी नहीं सकता। पांढुर्ना सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि ‘हनुमान जी का गढ़’ है। देश के बड़े-बड़े महानगरों में जहाँ अंगुलियों पर गिनने लायक हनुमान मंदिर होते हैं, वहीं हमारे पांढुर्ना मुख्यालय में 127 हनुमान मंदिर अडिग विश्वास के स्तंभ बनकर खड़े हैं। इसी पावन धरा पर साल 2025 की विदाई एक ऐसे आध्यात्मिक उत्सव के साथ होने जा रही है, जो भविष्य के सुनहरे पृष्ठों पर ‘स्वर्ण अक्षरों’ में लिखा जाएगा।

​विशाल जामसांवली पदयात्रा समिति ने इस बार आस्था, ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का ऐसा संगम तैयार किया है, जो पांढुर्ना के हर युवा, बुजुर्ग और मातृशक्ति को एक सूत्र में पिरो देगा।

पहला पड़ाव: ‘सनातन गर्जना’ — विचारों की आंधी (24 दिसंबर)

​उत्सव की शुरुआत बुधवार, 24 दिसंबर 2025 को एक वैचारिक क्रांति से होगी। जब लाखों सनातनियों के प्रेरणास्त्रोत और युवाओं की धड़कन माने जाने वाले प्रखर वक्ता मा. सोपान दादा कनेरकर पांढुर्ना की धरती पर कदम रखेंगे, तो माहौल बदल जाएगा।

  • क्या होगा खास: शाम 5:00 बजे, सरगम टॉकीज (नगर पालिका के पीछे) के प्रांगण में ‘सनातन गर्जना’ का आयोजन होगा। सोपान दादा का संबोधन केवल भाषण नहीं होता, वह सोए हुए स्वाभिमान को जगाने वाला ‘शंखनाद’ होता है। यह आयोजन युवाओं को यह याद दिलाने के लिए है कि हम किसकी संतान हैं और हमारी संस्कृति कितनी महान है। समिति का मानना है कि पहले ‘विचार’ शुद्ध होने चाहिए, तभी ‘यात्रा’ सफल होती है।

दूसरा पड़ाव: 38 किमी की ‘तपस्या’ — विशाल पदयात्रा (27 दिसंबर)

​विचारों की ऊर्जा लेकर, शनिवार 27 दिसंबर 2025 (वर्ष का अंतिम शनिवार) को पांढुर्ना की सड़कें ‘भगवा’ रंग में रंग जाएंगी। यह केवल पैदल चलना नहीं है, यह ‘माँ तापी-हनुमान लोक स्थापना यात्रा’ का संकल्प है।

  • दृश्य कैसा होगा: सुबह की पहली किरण के साथ, ठीक 7:00 बजे, नगर के हृदय स्थल गुजरी चौक स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर से जब हजारों भक्त “जय श्री राम” का उद्घोष करेंगे, तो पूरा आसमान गूंज उठेगा।
  • भक्ति का प्रवाह: पांढुर्ना से लेकर जामसांवली तक 38 किलोमीटर के रास्ते में सेवा और समर्पण की अविरत गंगा बहेगी। बच्चे, बूढ़े, जवान—सबकी जुबान पर बस एक ही नाम होगा। यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि पांढुर्ना, बैतूल और महाराष्ट्र के भक्त सीमाओं से नहीं, भावनाओं से जुड़े हैं।

संतों का सानिध्य: साक्षात आशीर्वाद की वर्षा

​इस 16वीं विशाल पदयात्रा को दिव्यता प्रदान करने के लिए संतों का विशेष सानिध्य प्राप्त हो रहा है। श्रद्धेय युवा संत श्री विवेक जी महाराज (आनंद धाम), श्री मदन भाऊ ठाकरे, और अन्य प्रतिष्ठित संत सबसे आगे चलकर भक्तों का मार्गदर्शन करेंगे। संतों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही अपने आप में एक पुण्य है।

विश्वास का मंत्र: “जिनका भरोसा वीर हनुमान…”

​समिति का यह ध्येय वाक्य— “जिनका भरोसा वीर हनुमान, उनका बिगड़ता नहीं कोई काम” — महज शब्दों का खेल नहीं, बल्कि लाखों भक्तों का निजी अनुभव है। साल 2010 में जो एक छोटा सा प्रयास था, आज वह जन-आंदोलन बन चुका है। मान्यता है कि साल के आखिरी शनिवार को इस पदयात्रा में शामिल होकर जो भक्त जामसांवली के ‘चमत्कारी सरकार’ के दर्शन करता है, उसके जीवन के सारे कष्ट 38 किमी की इस यात्रा में पसीने के साथ बह जाते हैं और वह नए साल में नई उम्मीद के साथ प्रवेश करता है।

पांढुर्ना वासियों के लिए एक ‘कॉल टू एक्शन’

​यह आयोजन किसी एक समिति का नहीं, पूरे पांढुर्ना जिले के गौरव का प्रश्न है। यह हमारी संस्कृति, हमारी एकता और हमारे आराध्य के प्रति समर्पण का उत्सव है।

पांढुर्ना वॉच आपसे अपील करता है:

  1. 24 दिसंबर को अपने बच्चों और युवाओं को लेकर सरगम टॉकीज जरूर पहुँचें, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़ सकें।
  2. 27 दिसंबर को सुबह गुजरी चौक आएं, भले ही आप पूरी यात्रा न कर सकें, लेकिन कुछ कदम चलकर इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा जरूर बनें।

​आइये, दुनिया को दिखा दें कि पांढुर्ना की एकता में कितनी शक्ति है!

📌 कार्यक्रम विवरण एक नज़र में (स्क्रीनशॉट ले लें):

​🚩 कार्यक्रम 1: सनातन गर्जना (विचार कुंभ)

  • वक्ता: मा. सोपान दादा कनेरकर
  • दिनांक: 24/12/2025 (बुधवार) | समय: शाम 5:00 बजे
  • स्थान: सरगम टॉकीज, न.पा. के पीछे, पांढुर्ना

​🚩 कार्यक्रम 2: विशाल जामसांवली पदयात्रा (भक्ति कुंभ)

  • नेतृत्व: संत श्री विवेक जी महाराज एवं अन्य संत वृन्द
  • दिनांक: 27/12/2025 (शनिवार) | समय: सुबह 7:00 बजे
  • प्रस्थान: प्राचीन हनुमान मंदिर, गुजरी चौक से जामसांवली धाम तक
  • आयोजक: विशाल जामसांवली पदयात्रा समिति एवं समस्त नगर/ग्रामवासी