
पांढुर्णा:कहते हैं कि माँ का कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता, लेकिन अपनी जननी की यादों को समाज सेवा के माध्यम से अमर कर देना ही एक पुत्र की सच्ची श्रद्धांजलि होती है। पांढुर्णा में संस्कारों और दानवीरता की एक ऐसी ही नई इबारत लिखी है समाजसेवी गणेश ‘बापू’ बालपांडे ने। उन्होंने अपनी स्वर्गवासी माताजी श्रीमती लक्ष्मीबाई बालपांडे की पावन स्मृति में निर्माणाधीन संत जगनाड़े महाराज सांस्कृतिक सभागृह के लिए 11 लाख 51 हजार रुपये की विशाल राशि अपनी निजी निधि से दान करने की घोषणा की है। इस घोषणा ने न केवल समाज को संबल दिया है, बल्कि हर पुत्र के लिए मातृ-भक्ति की एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है।

- माँ के चरणों में पुत्र की भावभीनी श्रद्धांजलि:गणेश बापू बालपांडे द्वारा दी गई यह राशि केवल आर्थिक सहयोग नहीं है, बल्कि यह उन संस्कारों का प्रतिबिंब है जो उन्हें अपनी माँ से मिले थे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह सहयोग उनकी माँ की यादों को जीवित रखने का एक छोटा सा प्रयास है। अपनी निजी कमाई से इतनी बड़ी राशि समाज के उत्थान के लिए देना, यह दर्शाता है कि जब इरादे नेक हों और दिल में अपनों के प्रति सम्मान हो, तो समाज निर्माण में सबसे बड़ा योगदान दिया जा सकता है। उनका यह कदम बताता है कि व्यक्ति चला जाता है, लेकिन उसके नाम से किए गए सत्कर्म सदैव जीवित रहते हैं।

- समाज के ‘स्वप्न-महल’ को मिली नई मजबूती: पांढुर्णा तेली समाज का यह निर्माणाधीन सांस्कृतिक भवन केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि समाज की एकता और भविष्य की धरोहर है। समाज अध्यक्ष श्री भूषण केवटे और उनकी पूरी टीम के अथक प्रयासों से यह सपना आकार ले रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में गणेश बापू द्वारा दी गई यह ‘संजीवनी राशि’ भवन निर्माण को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगी। समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि यह दान उस नींव के पत्थर की तरह है, जिस पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा। बापू का यह सहयोग समाज के अन्य भामाशाहों को भी आगे आने के लिए प्रेरित करेगा।

