April 10, 2026 4:00 pm

जिस रास्ते से गुजरते हैं SDM और कलेक्टर, उसी ‘मंडी रोड’ पर गरीबों के निवाले (PDS चावल) की कालाबाजारी; बिना ‘सौदा पत्रक’ के हो रही उपज की खरीदी

बिना ‘सौदा पत्रक’ के हो रही खरीदी: सीधे तौर पर राजस्व चोरी और धोखाधड़ी का मामला

 

पांढुर्ना |क्या पांढुर्णा में ‘कानून का राज’ केवल फाइलों तक सीमित रह गया है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि शहर का ‘जी रोड’, जो सीधे अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और कृषि उपज मंडी को जोड़ता है, इन दिनों ‘आर्थिक अपराध’ का केंद्र बन चुका है। प्रशासन की नाक के नीचे, दिन के उजाले में न केवल किसानों को लुटा जा रहा है, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में सेंधमारी कर गंभीर अपराध को अंजाम दिया जा रहा है।

1. मंडी अधिनियम का ‘मर्डर’ (Section Violation):

मप्र कृषि उपज मंडी अधिनियम के तहत, मंडी प्रांगण के बाहर बिना ‘सौदा पत्रक’ (Sauda Patrak) के उपज की खरीदी करना पूर्णतः अवैध है।

‘जी रोड’ पर सक्रिय व्यापारी न तो किसानों को कोई पक्की रसीद दे रहे हैं और न ही उनके पास मौके पर मंडी शुल्क चुकाने का कोई रिकॉर्ड है। कानूनी भाषा में इसे ‘कर अपवंचन’ (Tax Evasion) कहा जाता है। बिना रिकॉर्ड के ‘औने-पौने’ दाम पर खरीदी करना केवल व्यापारिक अनियमितता नहीं, बल्कि किसानों के साथ धोखाधड़ी (Section 420 IPC के तहत विचारणीय) की श्रेणी में आता है।

2. आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन (Non-Bailable Offense):

सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि इन अवैध कांटों पर सोसायटी का चावल (राशन का चावल) भी खरीदा जा रहा है।

ध्यान रहे, सार्वजनिक वितरण प्रणाली का चावल खरीदना और बेचना आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (Essential Commodities Act, 1955) की धारा 3/7 के तहत एक संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती अपराध है। जिस रास्ते से प्रशासन के आला अधिकारी गुजरते हैं, उसी रास्ते पर गरीबों के निवाले की कालाबाजारी होना, प्रशासन के खुफिया तंत्र और खाद्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

3. ‘लोकेशन’ ही सबसे बड़ा सवाल:

आमतौर पर अवैध काम अंधेरे में या शहर के बाहर होते हैं, लेकिन यहाँ हौसले इतने बुलंद हैं कि यह सब ‘जी रोड’ पर हो रहा है। यह वही मार्ग है जहाँ से जिले के कलेक्टर और एसडीएम अपने कार्यालय जाते हैं।

  • ​क्या मंडी के उड़नदस्ते (Flying Squad) को यह अवैध कांटे दिखाई नहीं देते?
  • ​क्या यह माना जाए कि यह सब किसी ‘मूक सहमति’ या ‘संरक्षण’ के चलते हो रहा है?

किसानों का शोषण:

मंडी जाते हुए किसानों को रास्ते में ही रोककर भ्रमित किया जाता है। चूंकि कोई ‘सौदा पत्रक’ नहीं दिया जाता, इसलिए किसान के पास इस बात का कोई सबूत नहीं बचता कि उसने अपनी उपज किसे बेची। यदि भुगतान में गड़बड़ी हो, तो किसान मंडी बोर्ड में शिकायत करने का अधिकारी भी नहीं रह जाता। यह सीधे तौर पर किसान के विधिक अधिकारों का हनन है।

प्रशासन के लिए सीधे सवाल:

  1. खाद्य विभाग: खुलेआम खरीदे जा रहे राशन के चावल पर अब तक जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  2. मंडी सचिव: मंडी प्रांगण के मुख्य मार्ग पर ही मंडी अधिनियम का उल्लंघन कैसे हो रहा है? बिना ‘सौदा पत्रक’ जारी किए खरीदी करने वाले व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं किए गए?
  3. राजस्व विभाग: सड़क किनारे (Patri/Roadside) अतिक्रमण कर चलाए जा रहे इस कारोबार पर प्रशासन खामोश क्यों है?

निष्कर्ष:

यह मामला केवल मंडी शुल्क की चोरी का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक इकबाल (Administrative Authority) का है। यदि कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय जाने वाले मार्ग पर ही कानून का भय समाप्त हो जाएगा, तो कानून व्यवस्था की स्थिति क्या होगी, यह विचारणीय है। सक्षम अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेकर इन अवैध कांटों को जब्त करना चाहिए और संबंधितों पर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।