
पांढुर्णा: केंद्र और राज्य सरकार गरीबों के पोषण के लिए करोड़ों की सब्सिडी वाला चावल (PDS) भेज रही है, लेकिन पांढुर्णा क्षेत्र में इस चावल की ‘गंतव्य’ (Destination) को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर और ग्रामीण अंचलों में जिस तरह की गतिविधियां देखी जा रही हैं, वे इशारा करती हैं कि कहीं न कहीं ‘सिस्टम’ में एक बड़ी सेंधमारी हो चुकी है, जिसे एक संगठित सिंडिकेट संचालित कर रहा है।
जागरूक नागरिकों और सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, राशन का यह चावल गरीब की थाली से निकलकर वापस बाजार में पहुँच रहा है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का है, बल्कि आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के खुले उल्लंघन का भी प्रतीत होता है।
1. जमीनी स्तर पर संदिग्ध गतिविधियां: यह ‘संग्रहण’ किसके लिए?
शहर के विभिन्न वार्डों और आसपास के गांवों में अक्सर दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर चावल की बोरियां ले जाते हुए संदिग्ध गतिविधियां देखी जा सकती हैं।
प्रशासन से सीधा सवाल: क्या खाद्य विभाग ने कभी यह जाँचने की जहमत उठाई कि सोसायटियों से राशन बंटने के बाद, यह चावल छोटी-छोटी मात्रा में इकट्ठा होकर अंततः जा कहाँ रहा है? क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई सोची-समझी चेन (Chain) काम कर रही है?
2. पर्दे के पीछे कौन? ‘सफेदपोश’ चेहरों पर संदेह की सुई
इस पूरे खेल में जो सबसे चिंताजनक पहलू है, वह है ‘संरक्षण’। जानकारों का कहना है कि जमीनी स्तर पर चावल इकट्ठा करने वाले लोग महज प्यादे हैं। इस अवैध नेटवर्क की डोर कथित तौर पर शहर के कुछ ऐसे ‘रसूखदार और सफेदपोश लोगों’ के हाथ में बताई जा रही है, जो समाज में प्रतिष्ठित बनकर घूम रहे हैं।
चर्चा है कि ये लोग अपनी काली कमाई और रसूख का इस्तेमाल करके छोटे लोगों को अपराध के लिए प्रेरित कर रहे हैं और खुद कानूनी कार्रवाई से बचे हुए हैं।
3. कानून का फंदा और ‘भागीदारी’ का जोखिम
हम स्पष्ट कर दें कि भारतीय कानून के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल का वाणिज्यिक (Commercial) इस्तेमाल या खरीद-फरोख्त पूर्णतः प्रतिबंधित है।
कानूनी चेतावनी: जो भी व्यक्ति—चाहे वह माल ढोने वाला हो, गोदाम मालिक हो, या इस नेटवर्क को फाइनेंस करने वाला कोई ‘बड़ा नाम’—यदि इस चेन में लिप्त पाया जाता है, तो कानूनन वह 7 साल तक की सजा का पात्र हो सकता है। कानून की नजर में अपराध करने वाला और अपराध को बढ़ावा देने वाला (Abettor), दोनों बराबर के दोषी हैं।
4. शहर में ‘तीन प्रमुख किरदारों’ को लेकर चर्चाएं तेज
दबी जुबान में शहर के प्रबुद्ध और जागरूक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि इस पूरे अवैध कारोबार को मुख्य रूप से ‘तीन विशिष्ट लोग’ (सिंडिकेट) संचालित कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि शहर में राशन के अवैध डायवर्जन का पूरा कंट्रोल रूम इन्हीं तीन लोगों के इर्द-गिर्द घूमता है।
हालांकि, यह जाँच का विषय है, लेकिन धुआं वहीं उठता है जहाँ आग लगी हो। क्या प्रशासन इन चर्चाओं की सत्यता परखने के लिए निष्पक्ष जाँच करेगा?
निष्कर्ष: कार्रवाई कब?
पांढुर्णा अब जिला है। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि प्रशासन केवल खानापूर्ति न करे। जनता यह देखना चाहती है कि कार्रवाई केवल ऑटो-रिक्शा वालों पर होती है, या फिर जाँच की आंच उन वातानुकूलित (AC) कमरों तक भी पहुँचती है जहाँ बैठकर इस पूरे ‘खेल’ की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।

