पांढुर्णा: प्राचीन गणपति मठ के संरक्षण हेतु श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब, पूर्व पटवारी पर राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का गंभीर आरोप


पांढुर्ना पाढुर्णा शहर के शारदा मार्केट (गणेश वार्ड) स्थित अति प्राचीन ‘सार्वजनिक गणपति मठ’ के संरक्षण और सुचारू जीर्णोद्धार की मांग को लेकर क्षेत्र की जनता पूरी तरह लामबंद हो गई है। मठ की सार्वजनिक संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर उत्पन्न विवाद और राजस्व रिकॉर्ड में पूर्व पटवारी द्वारा की गई कथित अनियमितताओं के विरोध में गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ‘दींडी यात्रा’ निकाली। नागरिकों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा लोकन्यास पंजीयक को ज्ञापन सौंपकर पूर्व पटवारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह पूरा घटनाक्रम जनता की गहरी आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को मजबूती से रेखांकित करता है।

​मामले के 6 विस्तृत और महत्वपूर्ण बिंदु:

1. जन-आस्था का ऐतिहासिक केंद्र और जीर्णोद्धार की आवश्यकता

ज्ञापन के अनुसार, सार्वजनिक गणपति मठ दशकों से पांढुर्णा वासियों की अगाध आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र रहा है। मठाधीपति शिवाचार्य स्वामीजी के मार्गदर्शन में यहां अनवरत धार्मिक और लोक-कल्याणकारी आयोजन होते रहे हैं। मठ के भवन के अत्यंत जर्जर हो जाने के कारण, श्रद्धालुओं के व्यापक जनसहयोग से इसका नवनिर्माण कार्य शुरू किया गया था, जो जनता की गहरी भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

2. सार्वजनिक संपत्ति पर अनुचित दावों से उत्पन्न भ्रम

मठ के पुनर्निर्माण के दौरान इसकी संपत्ति के स्वरूप को लेकर अचानक एक विवादित स्थिति पैदा हो गई। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि जो संपत्ति ऐतिहासिक रूप से सार्वजनिक रही है और जन-सहयोग से संचालित होती है, उस पर कुछ व्यक्तियों द्वारा अपना निजी आधिपत्य जताने का अनुचित प्रयास किया जा रहा है। इस दावे ने शांतिप्रिय श्रद्धालुओं के बीच गहरा असंतोष और चिंता पैदा कर दी है।

3. पूर्व पटवारी दिलीप जुननकर पर दस्तावेजी हेरफेर का गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद के मूल में राजस्व रिकॉर्ड की कथित विसंगतियां हैं। नागरिकों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में पूर्व पटवारी श्री दिलीप जुननकर (राजू) पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जनता का आरोप है कि पूर्व पटवारी ने कुछ लोगों से कथित मिलीभगत कर मूल राजस्व अभिलेखों में अनुचित रूप से कांट-छांट की। ज्ञापन के अनुसार, इस कथित दस्तावेजी हेरफेर के जरिये एक सार्वजनिक धार्मिक स्थल को निजी संपत्ति दर्शाने का प्रयास किया गया, जो कि जन-आस्था के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।

4. निर्माण में असामाजिक तत्वों का कथित अवरोध और जनता में रोष

रिकॉर्ड की इसी कथित त्रुटि का अनुचित लाभ उठाते हुए कुछ लोगों द्वारा मठ के शांतिपूर्ण पुनर्निर्माण कार्य को बार-बार बाधित किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन तत्वों द्वारा मठाधीपति के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। एक पवित्र आस्था के केंद्र पर इस तरह के कृत्य से आम जनता और श्रद्धालुओं में भारी रोष व्याप्त है।

5. ‘दींडी यात्रा’ के रूप में जनता का शांतिपूर्ण शक्ति प्रदर्शन

अपनी धार्मिक आस्था को सुरक्षित रखने और न्याय की गुहार लगाने के लिए भारी संख्या में नागरिकों ने लोकतांत्रिक मार्ग चुना। गुरुवार को निकाली गई ‘दींडी यात्रा’ में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। अत्यंत अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जनता ने प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश दिया कि मठ की पवित्रता और उसके सार्वजनिक स्वरूप से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

6. प्रशासन से त्वरित न्याय और कठोर कार्रवाई की 3 सूत्रीय मांग

आम जनता ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें पूरी स्पष्टता के साथ रखी हैं:

  • सार्वजनिक ट्रस्ट का गठन: 10 जुलाई 2024 से लंबित आवेदन का तुरंत निराकरण कर गणपति मठ को वैधानिक रूप से ‘सार्वजनिक ट्रस्ट’ घोषित किया जाए।
  • पूर्व पटवारी पर वैधानिक कार्रवाई: मूल रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर करने वाले पूर्व पटवारी दिलीप जुननकर और इस कृत्य में शामिल अन्य लोगों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच हो। दोष सिद्ध होने पर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • सुरक्षित नवनिर्माण: प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि प्राचीन मठ का पुनर्निर्माण कार्य बिना किसी विवाद के पूर्ण हो और बाधा उत्पन्न करने वाले तत्वों पर लगाम कसी जाए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह समाचार पूर्णतः पांढुर्णा के नागरिकों, श्रद्धालुओं और समाजजनों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा लोकन्यास पंजीयक को सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन में उल्लिखित तथ्यों और आरोपों पर आधारित है। पूर्व पटवारी या किसी अन्य पक्ष पर लगाए गए आरोप पूर्ण रूप से ज्ञापन का हिस्सा हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति और मालिकाना हक का विषय पूर्णतः स्थानीय प्रशासन और सक्षम न्यायालय की जांच के अधीन है। इस खबर का उद्देश्य केवल सार्वजनिक महत्व के विषय और घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी देना है, किसी भी व्यक्ति, अधिकारी, संस्था या समाज विशेष की भावनाओं को आहत करना या किसी की छवि धूमिल करना नहीं है।

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