July 4, 2026 11:26 pm

पांढुर्णा में ‘विशेष विकास विभाग’ का अनोखा गणित! – दो दुकान हटीं तो शहर ‘अतिक्रमण-मुक्त’ घोषित?

पांढुर्ना|अरे भाई! पांढुर्णा शहर के ‘विशेष विकास विभाग’ (उर्फ: ‘वी.वि.वि.’वीआईपी विरोध विहीन) ने जो कमाल किया है, उसे सुनकर आप हँसते-हँसते लोटपोट हो जाएँगे,

​’वी.वि.वि.’ के ‘मुख्य मुस्कुराते अधिकारी’  के निर्देश पर बस स्टैंड पर ‘सफाई अभियान’ चलाया गया।

​ दो दुकानों में मिला ‘पूरे शहर का अतिक्रमण’!

​’वी.वि.वि.’ की ‘नियम-पालन टोली’ ने बस स्टैंड का सर्वे किया और घोषणा की कि पूरे क्षेत्र में केवल दो ही दुकानें अतिक्रमण कर रही हैं!

​इन दो ‘अतिक्रमण शिरोमणि’ दुकानदारों को 24 घंटे की मोहलत दी गई है। मतलब, ‘वी.वि.वि.’ का मानना है कि इन दो दुकानों के हटते ही बस स्टैंड का समग्र अतिक्रमण भार शून्य हो जाएगा।

​यह निर्णय प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांत का एक ऐसा ‘आधुनिक, कलात्मक और चुनिंदा उपयोग’ है, जहाँ सैकड़ों अनियमित संरचनाओं को अनदेखा कर दिया गया है।

उदाहरण: यह ठीक वैसा ही है जैसे एक डॉक्टर कहे, “पूरे शरीर में केवल दो उंगलियां ही बीमार हैं, इन्हें काट दो! बाकी जो दिल, किडनी और फेफड़े में तकलीफ है, वो तो शरीर की ‘आंतरिक, रचनात्मक अभिव्यक्ति’ है, उसका इलाज नहीं होगा!”

 

​यानी, इन दो दुकानों के अलावा बाकी सभी कब्जे अब अतिक्रमण नहीं, बल्कि ‘वी.वि.वि.’ द्वारा बस स्टैंड को दिया गया ‘विशेष विकास डेकोरेशन’ माने जाएंगे!

​ ‘नजूल कॉम्प्लेक्स’ पर ‘वी.वि.वि.’ का आँखों पर पर्दा!

​अब बात करते हैं उन दो दुकानों के आस-पास, तीन-चार चौक में फैले विशाल और रहस्यमय नजूल कॉम्प्लेक्स की।

​अखबारों में खूब छपा है कि इस कॉम्प्लेक्स की क़ानूनी पारदर्शिता  पर सवाल हैं, पर ‘वी.वि.वि.’ इस मामले में ‘अटल चुप्पी’ साधे हुए है।

​जैसे ही कोई इस कॉम्प्लेक्स के कागज, नक्शे या अनुमति के बारे में पूछता है, ‘वी.वि.वि.’ के ‘मुख्य मुस्कुराते अधिकारी’ ऐसे मुस्कुराते हैं, जैसे उनसे पूछा गया हो कि “आपकी सैलरी कितनी है?” – जवाब न देना ही उनका सर्वोच्च संवैधानिक अधिकार है!

यह क्या दर्शाता है?

​’वी.वि.वि.’ का यह ‘दो दुकानों वाला गणित’ स्पष्ट करता है कि:

  1. कानून का डंडा केवल उन लोगों पर चलेगा जो संख्या में कमज़ोर हैं।
  2. कानून की आँख बड़े और रहस्यमय कॉम्प्लेक्सों को देखते ही अपने आप बंद हो जाती है।

सवाल तो बनता है:

तो क्या ‘विशेष विकास विभाग’ के ‘सीएमओ’ की नज़र में, पांढुर्णा का पूरा अतिक्रमण केवल दो दुकानों तक ही सीमित था, या यह ‘चुनिंदा कार्रवाई’ किसी ‘भव्य-दिव्य और अस्पष्ट’ विकास योजना को छुपाने का प्रयास है

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