April 10, 2026 5:26 pm

सौसर में पहली बार! विधायक के ‘स्वेच्छानुदान’ पर ऐसा ज्ञापन जिसने हिला दी सियासत

सौसर/पांढुर्णा: स्थानीय राजनीति में इन दिनों एक ऐसा ज्ञापन चर्चा का विषय बन गया है, जिसने गरीबों के हक की राशि के वितरण पर अभूतपूर्व सवाल खड़े किए हैं। यह ज्ञापन केवल आरोप पत्र नहीं है, बल्कि एक सीधी चुनौती है, जो क्षेत्र के आदिवासी समुदाय की ओर से वर्तमान विधायक की कार्यशैली पर दी गई है।

अधीक्षक महोदय को सौंपा गया यह ज्ञापन अपनी तरह का पहला दस्तावेज है, जिसमें स्वेच्छानुदान जैसी संवेदनशील राशि के दुरुपयोग पर इतने गंभीर और विशिष्ट दावे किए गए हैं।

​ निष्पक्ष पड़ताल: क्या है ‘करोड़ों’ की कहानी?

​ज्ञापन सौंपने वाले क्षेत्र के आदिवासी प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि शासन द्वारा गरीब, शोषित और विशेष रूप से आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए आवंटित स्वेच्छानुदान की राशि पिछले सात वर्षों में पात्र लोगों तक नहीं पहुंची है।

प्रतिनिधियों के अनुसार, आरोपों के मुख्य बिंदु:

  • पात्र वंचित: पिछले सात वर्षों में क्षेत्र के आदिवासी लोगों को यह राशि नहीं मिली।
  • अपात्र लाभार्थी: यह राशि कथित तौर पर समृद्ध व्यक्तियों के खातों में डाली गई है। सूची में इनकम टैक्स भरने वाले हार्डवेयर, किराना, मोबाइल और लोहा-सीमेंट के दुकानदार शामिल हैं।
  • चौंकाने वाला दावा: ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि महाराष्ट्र के निवासियों के खातों में भी लाखों रुपये डाले गए।
  • सबसे बड़ा सवाल: आरोप है कि विधायक के निजी सहायक के खाते में भी यह राशि करोड़ों रुपये की सीमा तक पहुंचाई गई है, जो सीधे तौर पर स्वेच्छानुदान के मूल उद्देश्य का उल्लंघन है।

​ज्ञापन में साफ कहा गया है कि जहाँ यह राशि अतिगरीबों के लिए थी, वहीं इसे अमीर लोगों को देकर गरीबों के हक को मारा गया है।

​ मंच पर ‘टकराव’ की तैयारी: 28 नवंबर को क्या होगा?

​आदिवासी प्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की जानकारी सीधे पूर्व सांसद नकुलनाथ जी को देने का निर्णय लिया है। उन्होंने निवेदन किया है कि उन्हें 28 नवंबर 2025 को बाजार चौक, सौसर में होने वाली आमसभा के दौरान उनसे मिलने का समय दिया जाए।

​ज्ञापन में प्रशासन और आयोजकों को स्पष्ट किया गया है कि यदि उन्हें निर्धारित समय पर मुलाकात का अवसर नहीं दिया जाता है, तो करीब 100 आदिवासी प्रतिनिधि मजबूरन मंच पर पहुंचकर इस मुद्दे को पूर्व सांसद और जनता के सामने उठाएंगे।

  • मनोवैज्ञानिक मोड़: यह निवेदन किसी शिकायत पत्र से कहीं अधिक है—यह एक ऐसी चुनौती है जो सीधे राजनीतिक नेतृत्व को संबोधित है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह आमसभा, स्थानीय विधायक के विरुद्ध लगाए गए इन अभूतपूर्व आरोपों के चलते एक बड़ा राजनीतिक ‘अखाड़ा’ बन सकती है। प्रशासन और आयोजक इस विस्फोटक स्थिति को कैसे संभालते हैं, यह देखना बाकी है।