April 10, 2026 5:26 pm

पांढुर्णा का ‘कृपापात्र परिसर’ — जहाँ सड़क बनी निजी गोदाम और जनता बनी दर्शक!

पांढुर्णा: इन दिनों शहर के बीचों-बीच स्थित ‘कृपापात्र परिसर’ अपने अनोखे ‘निर्माण प्रबंधन’ के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसा लगता है, इस विशेष परिसर के लिए सरकार ने न केवल ज़मीन बल्कि शहर की सड़कें भी एक अनोखे उपयोग के लिए आरक्षित कर दी हैं!

​जहाँ आम आदमी अपनी छोटी सी दुकान का सामान भी सड़क पर रखने से पहले सौ बार सोचता है, वहीं ‘कृपापात्र परिसर’ के मालिकों ने शायद सोचा—”सड़कें क्यों बनाई जाती हैं? जाहिर है, हमारे निर्माण में सहयोग देने के लिए!”

​सड़क नहीं, यह तो कॉम्प्लेक्स का मुफ्त स्टोर रूम है

​यह एक अद्भुत दृश्य है: सड़क के बीचों-बीच रेत, बजरी, सीमेंट और ईंटें ऐसे डाली गई हैं, मानो यह कोई विशाल निजी गोदाम हो, न कि आम जनता के चलने और वाहन चलाने का मार्ग! गाड़ियों को टेढ़े-मेढ़े रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, और पैदल चलने वाले राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं।

​सवाल यह है कि जिस नगर पालिका का काम शहर की सड़कों को साफ और सुगम रखना है, वह इस ‘कृपापात्र परिसर’ पर इतनी मेहरबान क्यों है? क्या इस परिसर को सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण करने का विशेष ‘VVIP परमिट’ मिला हुआ है, जो आम जनता को कभी नहीं मिलता?

जनता पूछ रही है: पांढुर्णा में क्या क़ानून सिर्फ़ छोटे ठेले वालों या साइकिल चलाने वालों के लिए है? या फिर ‘कृपापात्र परिसर’ के मालिकों को यह विशेष विशेषाधिकार प्राप्त है कि वे राजस्व की चोरी करें, रात में अवैध काम करें और दिन में जनता की सड़क जाम कर दें?