April 10, 2026 5:24 pm

सुरक्षा शून्य’ सड़क पर ‘नियम जी’ का अंतिम संस्कार: एक व्यंग्य कथा!

पांढुर्णा |एक समय की बात है, पांढुर्णा की सड़कें ‘विकास जी’ के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थीं। इसी बीच, हर सुबह ‘मैजिक महाराज’ अपनी सवारी लेकर निकलते। उनकी सवारी में बच्चे ऐसे भरे होते थे, जैसे किसी टिन के डिब्बे में मछलियाँ। बच्चे वाहन के पीछे लटकते, हवा में झूलते—यह परिवहन नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय झूलन प्रतियोगिता’ का दृश्य लगता था।

​पास ही, एक कोने में, ‘नियम जी’  एक फटे हुए बैनर के नीचे उदास बैठे थे। उन्हें उम्मीद थी कि ‘निष्क्रियता मंत्रालय’ से कोई ‘दंडाधिकारी’ आकर उनकी पूजा करेगा।

​एक दिन, ‘नियम जी’ ने ‘मैजिक महाराज’ को टोकते हुए कहा, “महाराज, यह धारा (सेक्शन) 184 (खतरनाक ड्राइविंग) का खुला उल्लंघन है! और बच्चों को लटकाना तो जुर्म है!”

​’मैजिक महाराज’ ने हँसते हुए उत्तर दिया, “अरे ‘नियम जी’, आप इतने पुराने हो गए हैं! यह उल्लंघन नहीं, यह ‘किराया प्रबंधन कौशल’ है! और रहा सवाल जुर्म का, तो ‘निष्क्रियता मंत्रालय’ ने हमें ‘कार्यमुक्त परमिट’  दे रखा है। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक उनकी नींद नहीं टूटेगी।”

​इतना सुनते ही, ‘नियम जी’ को दिल का दौरा पड़ गया।

​अंतिम संस्कार के समय, ‘निष्क्रियता मंत्रालय’ के एक अधिकारी (पहचान छिपाते हुए) दूर से खड़े होकर मुस्कुराए और बोले, “अच्छा हुआ, ‘नियम जी’ चले गए! अब हमें काम न करने का कोई बहाना नहीं बनाना पड़ेगा। जब तक ‘दुर्घटना देवता’ प्रसन्न नहीं होंगे, तब तक हमारी ‘सुविधा की नींद’ कौन तोड़ सकता है?”

​और इस प्रकार, पांढुर्णा की सड़कों पर ‘नियम जी’ का अंतिम संस्कार हो गया, और ‘मैजिक महाराज’ आज भी बच्चों को झूला झुला रहे हैं—सब कुछ ‘निष्क्रियता मंत्रालय’ की मूक सहमति से।