विशेष समाचार रिपोर्ट: माँ चंडिका धाम (किला ग्राउंड) की उपेक्षा पर जन-आक्रोश; अध्यक्ष श्री मनोज जी गुढ़धे के ‘शिरडी-शेगांव’ मॉडल वाले विज़न ने जगाई पांढुर्णा के कायाकल्प की उम्मीद

पांढुर्णा। संस्कृति और आस्था किसी भी क्षेत्र के सामूहिक स्वाभिमान, गौरव और चहुंमुखी विकास का मुख्य आधार होती हैं। पांढुर्णा की पावन धरा पर, सदियों पुराने ऐतिहासिक किला ग्राउंड में विराजमान आराध्य देवी माँ चंडिका केवल एक धार्मिक श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि पूरे पांढुर्णा जिले की चेतना और पहचान का मूल आधार हैं । किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि इस प्राचीन देवस्थान की ऐतिहासिक महत्ता को स्थानीय स्तर पर सदैव उपेक्षित रखा गया। साल में केवल एक बार उत्सवों के नाम पर खानापूर्ति करने वाली सोच ने इस 3.5 एकड़ में फैले विशाल और जाग्रत मंदिर परिसर के स्थायी विकास की दिशा में कभी कोई ठोस वैधानिक कदम नहीं उठाया । न तो नगर के प्रवेश द्वार पर माँ चंडिका के नाम का कोई भव्य तोरण द्वार बन सका, न ही यहाँ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए कोई सर्वसुविधायुक्त ‘भक्त निवास’ या हमारी प्राचीन किला धरोहरों को संजोने के लिए कोई ‘संग्रहालय’ स्थापित किया गया ।

ऐसे समय में, मंदिर समिति के वर्तमान यशस्वी अध्यक्ष श्री मनोज जी गुढ़धे द्वारा प्रस्तुत किए गए ‘शिरडी-शेगांव’ और ‘महाकाल’ तर्ज वाले अभूतपूर्व विकास के विज़न ने पूरे नगर में एक नई क्रांति और सकारात्मक चेतना की लहर फूंक दी है। अध्यक्ष महोदय के इस दूरदर्शी विचार को धरातल पर उतारने और इस 3.5 एकड़ की देव-भूमि को हमेशा के लिए सुरक्षित व अजेय बनाने के लिए निम्नलिखित 6 मुख्य रणनीतिक बिंदुओं के आधार पर एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हो रही है:

किला ग्राउंड की ऐतिहासिक उपेक्षा और उदासीनता पर कड़ा प्रहार

पांढुर्णा का किला ग्राउंड लगभग 3.5 एकड़ में फैला एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ साक्षात माँ चंडिका विराजमान हैं । परंतु आज तक इस पावन परिसर के बुनियादी ढाँचे और जीर्णोद्धार पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। शेगांव, शिरडी और उज्जैन जैसे धामों ने পুনরায় अपने क्षेत्रों की तरक्की का मार्ग प्रशस्त किया, लेकिन पांढुर्णा में माँ चंडिका के नाम पर स्थायी विकास की कूटनीतिक उपेक्षा की जाती रही। अब समय आ गया है कि समाज के प्रबुद्ध नागरिक और मंदिर प्रबंधन मिलकर पांढुर्णा के इस स्वाभिमान को वैधानिक रूप से जाग्रत करें।

शेगांव-शिरडी की तर्ज पर ‘सार्वजनिक लोक न्यास’ (पब्लिक ट्रस्ट) का अनिवार्य निर्माण

अध्यक्ष महोदय श्री मनोज जी गुढ़धे ने अपनी दूरदर्शिता दिखाते हुए जिन महान धामों (जैसे शेगांव के गजानन महाराज संस्थान या शिरडी साईं संस्थान) का उदाहरण प्रस्तुत किया है, उन सभी के विकास का गुप्त रहस्य उनका ‘सार्वजनिक लोक न्यास’ (पब्लिक ट्रस्ट) होना है। जब तक कोई धार्मिक स्थल सरकारी नियमों के अधीन ‘पब्लिक ट्रस्ट’ के रूप में पंजीकृत नहीं होता, तब तक उसे वैधानिक मान्यता और राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिलना असंभव है। अतः मंदिर को इस कानूनी ऊँचाई पर ले जाना ही विकास का पहला द्वार है।

मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951′ के अंतर्गत पंजीकरण का कूटनीतिक लाभ

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग, मध्य प्रदेश के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मंदिर का पंजीकरण **’मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951’** के तहत होना अनिवार्य है । इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होते ही चंडी माता मंदिर को वह वैधानिक शक्ति प्राप्त होगी, जिससे कोई भी बाहरी हस्तक्षेप या स्थानीय स्वार्थ मंदिर के स्वतंत्र प्रबंधन को प्रभावित नहीं कर सकेगा। यह पंजीकरण मंदिर को एक अभेद्य कानूनी सुरक्षा चक्र प्रदान करेगा।

भव्य भक्त निवास, संग्रहालय और शासकीय अनुदान  का मार्ग प्रशस्त होना

नगर के विकास और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक विशाल ‘भक्त निवास’ और पुरातन किला धरोहरों की रक्षा के लिए ‘संग्रहालय’ का निर्माण बेहद जरूरी है । वैधानिक नियमानुसार, कोई भी शासकीय विभाग या बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां (CSR के तहत) केवल उन्हीं धार्मिक परिसरों को निर्माण और विकास के लिए अनुदान (Grants) दे सकती हैं जो ‘पब्लिक ट्रस्ट’ के रूप में पंजीकृत और ऑडिटेड (धारा 15 के तहत लेखापरीक्षित) होते हैं । ट्रस्ट बनते ही बिना किसी अतिरिक्त बाधा के यहाँ भव्य भक्त निवास और कला दीर्घाओं के निर्माण के लिए सरकारी निधि का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाएगा।

3.5 एकड़ देव-भूमि की शाश्वत सुरक्षा और कानूनी कवच (धारा 32 व 14 का प्रभाव)

किला ग्राउंड की यह 3.5 एकड़ की बेशकीमती भूमि माँ चंडिका की अनमोल धरोहर है । भविष्य में बढ़ती आबादी और भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि से इस पवित्र भूमि को बचाना बेहद आवश्यक है। अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित वैधानिक सुरक्षा कवच कार्य करेंगे:

अदालती सुरक्षा (धारा 32): इस अधिनियम की धारा 32 के अनुसार, पंजीकृत होने के बाद ही ट्रस्ट को अपनी संपत्तियों और भूमि की रक्षा के लिए दीवानी अदालतों (Civil Courts) में वाद दायर करने और कानूनी लड़ाई जीतने का पूर्ण अधिकार मिलता है । अपंजीकृत रहने पर कानूनन अधिकारों को लागू कराने में विधिक बाधा आती है ।
संपत्ति का संरक्षण (धारा 14): धारा 14 यह सुनिश्चित करती है कि ट्रस्ट पंजीकृत होने के बाद मंदिर की सुई बराबर जमीन भी कोई व्यक्ति बिना जिला पंजीयक (कलेक्टर) की पूर्व मंजूरी के अपने नाम पर हस्तांतरित या खुर्द-बुर्द नहीं कर सकता । सर्वोच्च न्यायालय ने ‘पारसी जोरोस्ट्रियन अंजुमन’ मामले में यह भी स्पष्ट किया है कि यह अधिकार केवल न्यास के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए है, जिसका कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मनमाना दुरुपयोग नहीं कर सकता ।
वित्तीय पारदर्शिता (धारा 15 व 33): धारा 15 के तहत खातों का पारदर्शी ऑडिट और रखरखाव किया जाएगा , जो किसी भी चूक की दशा में धारा 33 के तहत लगने वाली विधिक शास्तियों (Penalties) से मंदिर प्रबंधन को सुरक्षित रखेगा ।

अध्यक्ष श्री मनोज जी गुढ़धे के मार्गदर्शक नेतृत्व में माननीय जिला कलेक्टर (पंजीयक) के समक्ष ऐतिहासिक जन-पहल

मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा 3 के अनुसार, जिले का ‘जिला कलेक्टर’ ही पदेन ‘लोक न्यास पंजीयक’ (Registrar of Public Trusts) होता है । माननीय उच्च न्यायालय ने भी हाल ही में पांढुर्णा जिले के ‘जामसांवली हनुमान मंदिर’ से जुड़े ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल जिला कलेक्टर ही न्यास के मामलों में मूल अर्ध-न्यायिक क्षेत्राधिकार रखते हैं ।

अतः किसी भी कानूनी त्रुटि से बचने और विधिक रूप से 100% अचूक प्रक्रिया अपनाने के लिए, यशस्वी अध्यक्ष श्री मनोज जी गुढ़धे के मार्गदर्शक नेतृत्व में बहुत जल्द पांढुर्णा का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे **माननीय जिला कलेक्टर (पंजीयक लोक न्यास, पांढुर्णा)** से भेंट करेगा। प्रतिनिधिमंडल मंदिर को वैधानिक रूप से ‘सार्वजनिक लोक न्यास’ घोषित करने का आधिकारिक आवेदन सौंपेगा। यह कदम पांढुर्णा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।
*”हम रहें या न रहें, माँ चंडिका की यह पावन भूमि और हमारा स्वाभिमान अनंत काल तक अडिग रहना चाहिए।”* पांढुर्णा के उज्ज्वल भविष्य और तरक्की के इस नव-निर्माण आंदोलन में अपनी आहुति देने के लिए सभी भक्तों से इस कूटनीतिक, विधिक और पवित्र पहल में जुड़ने का आह्वान किया जाता है।

**।। जय माँ चंडिका ।।**

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