सिराठा पंचायत: विकास के नाम पर ‘कथित’ लूट? पहली बारिश में बही 4 लाख की नाली, सरपंच और सचिव विजेंद्र धुर्वे पर निर्माण सामग्री बेचने का गंभीर आरोप

पांढुर्णा जिले की ग्राम पंचायत सिराठा में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत और जवाबदेही पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। कलेक्टर महोदय की जनसुनवाई में सिराठा के निर्वाचित पंचों ने लामबंद होकर एक ऐसा शिकायती पत्र सौंपा है, जिसने पंचायत स्तर पर चल रही कथित प्रशासनिक मनमानी की पोल खोल कर रख दी है। पंचों द्वारा हस्ताक्षरित इस लिखित शिकायत में वर्तमान सरपंच और पंचायत सचिव विजेंद्र धुर्वे पर पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी खजाने को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने के ऐसे संगीन आरोप लगाए गए हैं, जो किसी भी पारदर्शी व्यवस्था को झकझोरने के लिए काफी हैं।

शिकायत पत्र में दर्ज 5 सबसे गंभीर और चौंकाने वाले आरोप:

  • सरकारी निर्माण सामग्री को खुर्द-बुर्द करने का आरोप: शिकायत में सबसे सनसनीखेज दावा वर्ष 2017 में स्वीकृत आंगनवाड़ी भवन को लेकर किया गया है। पत्र के अनुसार, भवन आज तक अधूरा है जबकि राशि पूरी निकाली जा चुकी है। पंचों का आरोप है कि निर्माण पूरा करने के लिए पूर्व सचिव (केशव ईवनाती) द्वारा जो सामग्री (10 क्विंटल सरिया, 100 बोरी सीमेंट, रेत-गिट्टी और 3000 ईंटें) लाई गई थी, उसे वर्तमान सरपंच और सचिव विजेंद्र धुर्वे द्वारा कथित रूप से बेच दिया गया है।
  • भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 4 लाख की नाली: विकास के दावों की असलियत बयान करता एक और आरोप नाली निर्माण का है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, रोजगार सहायक के घर के पास मात्र तीन माह पूर्व 4 लाख रुपये की भारी लागत से 100 मीटर नाली बनाई गई थी। यह नाली गुणवत्ता में इतनी निम्न स्तर की थी कि पहली ही बारिश के पानी का दबाव नहीं झेल सकी और ढह गई।
  • कागजों पर बैठकें, फर्जी बिलों से राशि निकालने का आरोप: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी का एक बेहद गंभीर मुद्दा भी इस शिकायत में उठाया गया है। पंचों का दावा है कि ग्राम पंचायत सिराठा में ग्रामसभा और मासिक बैठकें नियम-कानून के तहत नहीं हो रही हैं (छह माह में मात्र एक बार)। आरोप है कि बिना बैठकों के और अपनी मनमानी करते हुए, सरपंच और सचिव विजेंद्र धुर्वे पंचायत में कथित तौर पर फर्जी बिल लगाकर लगातार राशि का आहरण कर रहे हैं।
  • प्यासे ग्रामीण और शो-पीस बनी पानी की टंकी: ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों के साथ कथित खिलवाड़ का आलम यह है कि पी.एच.ई. विभाग द्वारा 3 साल पहले बनाई गई पानी की टंकी आज तक पंचायत द्वारा उपयोग में नहीं लाई जा सकी है। शिकायत के अनुसार, पंचायत की इस घोर अनदेखी के कारण ग्रामवासियों के सामने पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है।
  • सी.सी. रोड की गुणवत्ता पर सवाल: सिराठा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से माध्यमिक स्कूल तक हाल ही में बनाई गई सी.सी. रोड को लेकर भी पंचों ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई है और इसे पूर्णतः गुणवत्ताहीन बताया है।

प्रशासनिक जांच और जनहित का सवाल:

यदि एक चुनी हुई पंचायत के पंचों द्वारा जिला कलेक्टर को सौंपे गए इस आधिकारिक शिकायती पत्र के तथ्यों में जरा भी सच्चाई है, तो यह विकास कार्यों में एक बड़ी लापरवाही और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। जनहित की मांग है कि जिला प्रशासन बिना किसी देरी के इन सभी गंभीर बिंदुओं की एक उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे। ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके और यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो दोषियों पर नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई हो।

 वैधानिक सूचना एवं डिस्क्लेमर (Legal Disclaimer):

यह समाचार पूर्णतः ग्राम पंचायत सिराठा के पंचों (आवेदकगण) द्वारा श्रीमान जिला कलेक्टर, पांढुर्णा को ‘जनसुनवाई’ में विधिवत प्रस्तुत किए गए आधिकारिक शिकायत पत्र के तथ्यों और उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। हमारा समाचार माध्यम इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि (Verify) नहीं करता है। इस खबर का प्राथमिक उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की छवि धूमिल करना या मानहानि करना नहीं है, बल्कि एक सार्वजनिक दस्तावेज (Public Document) के आधार पर जनहित से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रशासन और आम जनता के संज्ञान में लाना है। मामले की सत्यता और अंतिम निर्णय पूर्ण रूप से सक्षम प्राधिकारी/जिला प्रशासन की आधिकारिक जांच के अधीन है।