
पांढुर्ना पांढुर्णा के नागरिकों की आस्था और भावनाएं परमहंस श्री श्री 1008 श्री धूनीवाले श्री दादाजी महाराज से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1954 से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पांढुर्णा से खंडवा धाम तक परंपरागत निशान पदयात्रा की जो पवित्र लौ जली थी, वह आज भी पूरी श्रद्धा के साथ प्रज्वलित है। लेकिन इस वर्ष की पदयात्रा केवल आध्यात्मिक नहीं है, बल्कि यह पांढुर्णा और आसपास के पूरे क्षेत्र की एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण मांग का प्रतीक बन गई है। “भजलो दादाजी का नाम, भजलो हरिहर जी का नाम” का संकीर्तन करते हुए भक्त मनोज गुडधे और अन्य श्रद्धालु नंगे पांव 360 किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। इस बार गुरु चरणों में निशान अर्पित करने के साथ-साथ एक विशेष अर्जी लगाई जाएगी— क्षेत्र की जीवनरेखा रही ‘दादा धाम एक्सप्रेस’ को पुनः शुरू कराने की अर्जी।
खबर के छह मुख्य बिंदु:
1. आस्था का महासंकल्प: 360 किमी की नंगे पांव निशान पदयात्रा
यह यात्रा केवल शारीरिक दूरी तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के अडिग विश्वास का प्रमाण है। गुरु पूर्णिमा उत्सव पर पांढुर्णा से शुरू हुई यह पदयात्रा लगभग 360 किलोमीटर का सफर नंगे पांव तय करेगी। भीषण गर्मी या बारिश की परवाह किए बिना श्रद्धालु सीधे गुरु के चरणों में अपनी सामूहिक प्रार्थना लेकर जा रहे हैं।
2. 2011 में खुशी में उठे थे कदम, आज न्याय की है गुहार
यह एक भावुक संयोग है कि जब 18 जनवरी 2011 को दादा धाम एक्सप्रेस (अप 22112 एवं डाउन 22111) शुरू हुई थी, तब इसी खुशी में भक्त मनोज गुडधे ने गुरु पूर्णिमा पर पांढुर्णा से खंडवा तक नंगे पांव यात्रा कर गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की थी। आज 15 वर्ष बाद वही भक्त उसी रास्ते पर फिर नंगे पांव चल रहा है, लेकिन इस बार आंखों में खुशी नहीं, बल्कि बंद पड़ी ट्रेन को फिर से पटरियों पर लाने की गुहार है।
3. हजारों बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लिए जीवनरेखा थी यह ट्रेन
नागपुर से भुसावल (वाया इटारसी) चलने वाली यह ट्रेन पांढुर्णा, सौंसर, मुलताई और बैतूल के लोगों के लिए एक वरदान थी। इसके कारण बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को इटारसी में ट्रेन बदलने के झंझट, अतिरिक्त खर्च और गलत ट्रेन में बैठने के डर से मुक्ति मिल गई थी। यह ट्रेन सीधे समाधि स्थल तक पहुंचने का सबसे सुरक्षित और सुलभ साधन थी, जिसका बंद होना जनभावनाओं पर गहरी चोट है।
4. कोरोना काल में थमे पहिए, क्रमिक अनशन के बाद भी रेलवे मौन
वर्ष 2020 में कोविड महामारी के दौरान सप्ताह में तीन दिन चलने वाली इस एक्सप्रेस को बंद कर दिया गया था। विडंबना यह है कि छह वर्ष बीत जाने के बाद भी इसे बहाल नहीं किया गया। पांढुर्णा की जनता ने इसके लिए लगातार ज्ञापन सौंपे और करीब दो महीने तक क्रमिक धरना भी दिया, लेकिन रेलवे प्रशासन की उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण मांग अब तक अनसुनी है।
5. सांसद के संकल्प पत्र और पदयात्रा से जगी है क्षेत्रीय उम्मीद
इस ज्वलंत मुद्दे पर क्षेत्रवासियों को लोकसभा चुनाव से पूर्व छिंदवाड़ा-पांढुर्णा के सांसद विवेक बंटी साहू द्वारा दिए गए संकल्प पत्र से बहुत आशाएं हैं, जिसमें ट्रेन को पुनः शुरू कराने का वादा किया गया था। स्वयं सांसद महोदय दादाजी महाराज के परम भक्त हैं और वर्ष 2025 की गुरु पूर्णिमा पर छिंदवाड़ा से खंडवा तक पदयात्रा कर चुके हैं। पांढुर्णा की जनता को पूर्ण विश्वास है कि उनके सार्थक प्रयासों से यह रेल सेवा जल्द बहाल होगी।
6. जन-जन की सामूहिक आवाज बन रहा है पदयात्रियों का जत्था
मनोज गुडधे के नेतृत्व में यह पदयात्रा व्यक्तिगत न होकर पूरे क्षेत्र की सामूहिक भावना का प्रतिनिधित्व कर रही है। इस पवित्र उद्देश्य में उनके साथ नर्मदा परिक्रमावासी शंकर महाराज, बालकृष्णा (मामा) पराड़कर, दिनेश बोकडे, शशिकांत अम्बुलकर, किशोर भाइक, उमेश बरगट, विवेक चऊत्रे, चेतन हेड़ाऊ, विवेक मानकर, रवी खोड़े, जितेंद्र काकड़े, शुभम खरवड़े, कुणाल पालीवाल, टिंकू बोबडे, जीतू गिरडकर और संदीप डहारे जैसे समर्पित भक्त कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
पांढुर्णा की जनता को पूर्ण विश्वास है कि दादाजी महाराज के दरबार में लगाई गई यह अर्जी खाली नहीं जाएगी और बहुत जल्द ‘दादा धाम एक्सप्रेस’ फिर से हजारों श्रद्धालुओं को उनके आराध्य के द्वार तक लेकर जाएगी।

